तीन तलाक बिल लोकसभा में पास होने के बाद राज्य सभा में अटक गया है। राज्य सभा में सरकार के सांसदों की संख्या बहुमत में नहीं है। सरकार बिल को उच्च सदन में पास कराकर कानून बनाने के प्रयास में लगी है। सरकार के प्रयासों ने इस बार बीजेपी के राज्य सभा सांसदों की छुट्टियों में खलल डाल दी। दरअसल, सरकार ने अचानक वीकेंड के बाद सोमवार (31 दिसंबर) को राज्यसभा में बिल पेश करने का फैसला किया और इसके लिए राज्य सभा सांसदों को उच्च सदन में हाजिर रहने के लिए व्हिप भी जारी कर दिया गया था। इससे परिवार संग छुट्टियां मना रहे सांसदों को लौटना पड़ गया। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक क्रिसमस सप्ताह में बच्चों के स्कूल से छुट्टियां हो जाने पर कई सांसदों ने परिवार संग बाहर जाने का प्रबंध कर लिया था। कुछ तो परिवार संग अपनी हॉलीडे डेस्टिनेशन पर पहुंच भी गए थे जब उन्हें व्हिप मिला। लिहाजा सांसदों को दिल्ली लौटना पड़ा। एक सांसद ने टिप्पणी की, ”भले ही तीन तलाक बिल पास हो या नहीं लेकिन घर में तलाक की बात हो रही है।”
बता दें कि राज्य सभा में कुल 244 सदस्य हैं। बहुमत के लिए 123 सदस्यों की संख्या चाहिए और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के 98 सदस्य ही हैं। बिल के विरोध में करीब 136 सांसद बताए जा रहे हैं। तीन तलाक बिल को लेकर कांग्रेस इस बात पर अड़ी है कि विधेयक को फिर से चयन समिति के पास भेजा जाना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने बिल पर पर्याप्त बहस नहीं कराई। रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन तलाक को लेकर अध्यादेश की समयावधि 8 जनवरी तक की है। अगर सरकार 8 जनवरी तक बिल को पास कराने में असफल रहती है तो उसे फिर अध्यादेश लाने पर विचार करना पड़ेगा।
बता दें कि अगस्त 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने1400 साल पुरानी तीन तलाक की प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था। शीर्ष अदालत ने सरकार से कहा था कि वह इस पर कानून बनाए। सरकार दिसंबर 2017 में लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक लाई। लोकसभा में यह बिल पास हो गया लेकिन राज्य सभा में अटक गया था। विपक्ष ने इस बिल में तीन तलाक के आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान जोड़ने बात कही थी। संशोधन के बाद बिल फिर से अटक गया। सितंबर 2018 में सरकार अध्यादेश लाई। विपक्ष की मांग पर आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान जोड़ा गया लेकिन सरकार के कई प्रयासों के बाद बिल फिलहाल कानून बनने की राह में है।
