नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती को केंद्र सरकार ने पराक्रम दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की है। इसी कड़ी में रेलवे ने अपनी सबसे पुरानी ट्रेनों में शामिल कालका मेल का नाम बदल कर नेताजी एक्सप्रेस कर दिया है।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कालका मेल का नाम बदलने की जानकारी ट्विटर पर दी। उन्होंने ट्वीट किया कि नेताजी के पराक्रम ने भारत को स्वतंत्रता और विकास के एक्सप्रेस मार्ग पर पहुंचा दिया। मैं नेताजी एक्सप्रेस की शुरुआत के साथ उनकी जयंती मनाने के लिए रोमांचित हूं।

एक जनवरी 1866 को कालका मेल पहली बार चली थी। उस वक्त इसका नाम 63 अप हावड़ा पेशावर एक्सप्रेस था। जानकारी के अनुसार 18 जनवरी 1941 को अंग्रेजों को चकमा देकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस धनबाद जिले के गोमो जंक्शन से इसी ट्रेन पर सवार होकर निकले थे।

नेताजी की यादों से जुड़ी होने के कारण ही रेलवे ने कालका मेल का नाम बदलकर नेताजी एक्सप्रेस कर दिया है। हावड़ा कालका मेल अभी स्पेशल ट्रेन बनकर चल रही है। कालका मेल ट्रेन अपने पुराने नंबर के साथ ही 12311 अप और 12312 डाउन नेताजी एक्सप्रेस बनकर चलेगी।

केंद्र सरकार इस वर्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती को पराक्रम दिवस के तौर पर मना रही है। इस महान क्रांतिकारी के जीवन के अंतिम पल आज तक रहस्य बने हए हैं। इस पर कई बार बातें हुईं, आयोग बने, जांच हुईं, बहसों और तर्कों के लंबे दौर चले, लेकिन यह सवाल जस का तस है।

वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने हवाई हादसे में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निधन पर बरकरार संदेह को शांत करने के लिए तीसरे जांच आयोग का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट के जज मनोज कुमार मुखर्जी को इस मामले में जांच करने का दायित्व सौंपा। मुखर्जी आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि नेताजी का निधन हवाई हादसे में नहीं हुआ था।