सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब चुनाव के नतीजे आने तक सतलुज यमुना संपर्क नहर विवाद मामले की सुनवाई 11 मार्च तक टालने के पंजाब सरकार के अनुरोध पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और ऐसा करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठ ने पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी के इस आग्रह पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा-चुनाव नतीजों के लिए अदालतों का इंतजार का क्या मतलब है। इसके बाद अदालत इस मामले की सुनवाई 22 फरवरी के लिए निर्धारित कर दी। इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही पंजाब सरकार ने पीठ से कहा कि उसने हरियाणा की याचिका पर अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है और इसे शीघ्र ही दाखिल किया जाएगा। हरियाणा सरकार ने इस याचिका में शीर्ष अदालत के पहले के आदेशों पर अमल का अनुरोध किया है। जेठलानी ने कहा कि वे केंद्र के जवाब पर भी प्रत्युत्तर दाखिल करेंगे और इसके लिए उन्हें समय चाहिए।
पीठ ने 20 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का पंजाब सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने संबंधी अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। शीर्ष अदालत ने इससे पहले कहा था कि पंजाब और हरियाणा के बीच सतलुज समुना संपर्क नहर विवाद मामले में पहले पारित डिक्रियों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोनों राज्यों को अपने आदेशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया था। अदालत ने पिछले साल 30 नवंबर को सतलुज यमुना संपर्क नहर मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देते हुए केंद्रीय गृह सचिव, पंजाब के मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस महानिदेशक को इसकी जमीन, सारे कार्यों, संपत्ति और नहर के हिस्सों का रिसीवर नियुक्त कर दिया था।
अदालत ने उनसे कहा था कि वे सारी संपत्ति की वस्तुस्थिति के बारे में अपनी रिपोर्ट दाखिल करें। यही नहीं अदालत ने सतलुज यमुना संपर्क नहर जल बंटवारा समझौते से बाहर निकलने के पंजाब सरकार के प्रयासों को यह कहते हुए विफल कर दिया था कि वह एकतरफा इसे निरस्त नहीं कर सकती और न ही सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को निष्प्रभावी बनाने का कानून बना सकती है।

