ग्रामीण भारत को आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने ड्रोन सर्वेक्षण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का कमाल दिखाया है। स्वामित्व योजना के जरिए गांवों की आबादी का सटीक सर्वेक्षण कर ग्रामीण घरों को कानूनी संपत्ति पहचान (आइडी) दी गई है। अब इन आंकड़ों का एआइ से विश्लेषण कर गांवों में जल निकासी, सड़कें, सीवरेज लाइनें और बिजली खंभे जैसी नागरिक सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ड्रोन से लिए गए चित्रों का रेजोल्यूशन 1:500 है, जो गूगल अर्थ से कहीं ज्यादा सटीक है। इनसे गांवों की थ्री-डी इमेज भी बनी है, जिसमें लंबाई-ऊंचाई की सटीक जानकारी है। सर्वे में शामिल 3.27 लाख गांवों में यह भी पता चल गया है कि कौन से घरों की छतें कच्ची हैं और कौन सी पक्की।

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इसके बेहतर उपयोग के लिए मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआटी) बाम्बे के साथ ‘हैकाथान’ आयोजित किया। इसमें 30 स्टार्टअप टीमों ने ड्रोन के ‘पाइंट क्लाउड डेटा’ से डिजिटल इलाका माडल बनाने जैसे सुझाव दिए। इससे जल प्रवाह का पैटर्न समझकर जलभराव वाले इलाकों की पहचान और बेहतर नाली प्रणाली डिजाइन संभव होगी। तीन सर्वश्रेष्ठ टीमों का चयन भी हो चुका है।

वाराणसी में पायलट परियोजना

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सात गांवों—पूरे, कुरुहुआ, जयापुर, नागेपुर, बरियार, परामपुर और खखरिया में यह योजना पायलट के रूप में चल रही है। यहां उच्च रेजोल्यूशन वाले भू-स्थानिक और हाइड्रो-मौसमीय आंकड़ों से गांव स्तर पर जल निकासी नेटवर्क का डिजाइन तैयार किया गया।

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भूमि की बनावट, उपयोग और वर्षा विश्लेषण से तालाब स्थलों की भी पहचान हुई। जमीनी सत्यापन के लिए गांवों में व्यक्तिगत सर्वे भी किए गए। 24 जनवरी को इन गांवों में प्रस्तुति होगी, जिसमें पंचायत प्रधान, सचिव, खंड विकास अधिकारी, राज्य पंचायती राज और ग्रामीण इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।

चर्चा और फीडबैक के बाद योजना को विस्तार दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि यह पायलट दिखाएगा कि ड्रोन डेटा, हाइड्रोलाजिकल माडलिंग और जमीनी जांच को कैसे एकीकृत कर गांवों में वैज्ञानिक विकास किया जा सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा।

3.27 लाख गांवों का ड्रोन सर्वेक्षण पूरा

लक्षित 3.40 लाख गांवों में से 3.27 लाख गांवों का ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, जिससे उच्च गुणवत्ता और उच्च रेजोल्यूशन वाला अत्यंत सूक्ष्म आंकड़े प्राप्त हए हैं। अब तक 1.50 लाख गांवों में संपत्ति कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। स्वामित्व कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया गांवों के ड्रोन सर्वेक्षण से शुरू होती है, जिसके बाद कई स्तरों पर सत्यापन, मानचित्र तैयार करना और भौतिक जांच होती है। अंतिम सत्यापन के बाद कार्ड वितरित किए जाते हैं।