मुस्लिम से शादी करने वाली हिंदू महिला की शिकायत पर 24 घंटे के अंदर पासपोर्ट मुहैया कराने के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को इस वक्त सोशल मीडिया पर लोगों की कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। ट्विटर पर लोग उन्हें खरी-खोटी सुना रहे हैं और उनके खिलाफ अभियान भी चलाया जा रहा है। ट्विटर यूजर्स के एक धड़े द्वारा हो रही आलोचना पर अब आखिरकार रविवार (24 जून) को सुषमा स्वराज ने चुप्पी तोड़ दी है और बेहद ही खास अंदाज में आलोचकों को जवाब दिया है। उन्होंने खरी-खोटी सुनाने वालों के ही ट्वीट को लाइक किया है, साथ ही एक अन्य ट्वीट कर यह भी बताया है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया है? स्वराज ने कहा, ‘मैं 17 जून से 23 जून तक भारत में नहीं थी। मैं नहीं जानती कि मेरी गैर हाजिरी में यहां क्या हुआ। हालांकि कुछ ट्वीट्स के कारण मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रही हूं। उन ट्वीट्स को मैं आपसे शेयर कर रही हूं, इसलिए मैंने उन्हें लाइक किया है।’
I was out of India from 17th to 23rd June 2018. I do not know what happened in my absence. However, I am honoured with some tweets. I am sharing them with you. So I have liked them.
— Sushma Swaraj (@SushmaSwaraj) June 24, 2018

क्या है मामला?
दरअसल, 12 साल पहले मोहम्मद अनस नाम के व्यक्ति से शादी करने वाली तन्वी सेठ ने लखनऊ में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। हाल ही में उन्हें पासपोर्ट ऑफिस की तरफ से इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। तन्वी के मुताबिक पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्रा ने उन्हें और उनके पति को धर्म के आधार पर अपमानित किया और कहा कि उनका पासपोर्ट नहीं बन सकता क्योंकि उन्होंने एक मुस्लिम युवक से शादी की है और पासपोर्ट के लिए नाम बदलना होगा। तन्वी ने अधिकारी की शिकायत ट्विटर पर सुषमा स्वराज और पीएमए से की, जिसके बाद विकास मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया और तन्वी को 24 घंटे के अंदर हाथों हाथ पासपोर्ट सौंप दिया गया।
वहीं मिश्रा ने अपने बचाव में कहा कि इस मामले का धर्म से लेना-देना नहीं है और उन्होंने तन्वी से कहा था कि उनका निकाहनामा उनका नाम शाजिया अनस दिखाता है, जिसे उनकी फाइल में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया से कहा कि इसके लिए तन्वी ने इनकार कर दिया। फिलहाल मिश्रा का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। ये सब होने के बाद से ही ट्विटर पर लोग सुषमा स्वराज को खरी खोटी सुना रहे हैं। लोग विदेश मंत्री के मंत्रालय के ऊपर विशेष धर्म के लोगों का तुष्टीकरण करने का आरोप भी लगा रहे हैं।

