नए साल के साथ ही कश्मीर घाटी में करीब पांच महीने से बंद मोबाइल एसएमएस सेवा आधी रात से बहाल कर दी गई है। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में ब्रॉडबैंड सेवाएं भी शुरू की गई हैं। जम्मू कश्मीर के प्रमुख सचिव रोहित कंसल ने इस बात की जानकारी दी। इससे पहले छात्रों, छात्रवृत्ति आवेदकों, कारोबारियों और अन्य की सुविधा के लिए दस दिसंबर को मोबाइल फोन पर एसएमएस सेवा शुरू की गई थी। कंसल ने कहा कि 31 दिसंबर की मध्यरात्रि से पूरे कश्मीर में सेवाएं पूरी तरह बहाल करने का फैसला लिया गया है।

कंसल ने कहा, ‘एसएमएस सेवाएं व अस्पतालों में इंटरनेट को 31 दिसंबर की आधी रात से शुरू किया जा रहा है। हालात सामान्य करने के सरकार के प्रयासों का यह नतीजा है।’ उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर रोक के कारण अस्पतालों में बीमारों की तीमारदारी प्रभावित हो रही थी। कश्मीर में चलाई जा रही सेव हार्ट कश्मीर नाम सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई। इस सेवा के तहत दो सौ चिकित्सकों का एक व्हॉट्सएप समूह दिल के दौरे पड़ने पर सेवाएं दिया करता था।
सरकार ने कुल 149 दिन तक एसएमएस सेवाओं पर प्रतिबंध रखा। एसएमएस सेवाओं को बहाल करने का निर्णय पांच कश्मीरी नेताओं को रिहा करने के एक दिन बाद आया है। पूरे जम्मू और कश्मीर में सभी नेटवर्क और लैंडलाइन फोन सेवाएं पांच अगस्त को निलंबित कर दी गई थी। केंद्र सरकार ने पांच अगस्त को राज्य का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था और मोबाइल सेवाओं पर रोक लगा दी थी।

जम्मू में प्रतिबंध के कुछ दिनों बाद ही संचार सेवाएं बहाल कर दी गई थीं और अगस्त के मध्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी शुरू कर दी गई थीं। 18 अगस्त को मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं थी। लेकिन कश्मीर में यह पाबंदी जारी रही। अक्तूबर में कश्मीर में भी पोस्ट पेड मोबाइल सेवा बहाल कर दी गई थीं।
एसएमएस सेवा संबंधी आदेश के एक दिन पहले ही जम्मू कश्मीर के पांच पूर्व विधायकों को हिरासत से रिहा कर दिया गया। बीते अगस्त महीने में विशेष राज्य का दर्जा मिलने के बाद से ये नेता हिरासत में थे। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला अब भी हिरासत में हैं। इन नेताओं की रिहाई के बारे में पूछे जाने पर कंसल ने कहा कि हालात का आकलन करने के बाद स्थानीय प्रशासन फैसला करेगा।