केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) योजना हटाने का बचाव किया। उन्होंने इसे विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम से बदलने का बचाव किया। गुजरात दौरे के दौरान कृषि मंत्री ने मनरेगा कानून के कार्यान्वयन में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि इस कानून के तहत काम मजदूरों के बजाय मशीनों और ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि नया वीबी-जी राम जी अधिनियम इन अनियमितताओं को रोकेगा।

केंद्रीय मंत्री ने मनरेगा को ‘भ्रष्टाचार का सागर’ बताते हुए कहा कि इसे अब लागू नहीं किया जाएगा और यह घोषणा की कि इस मामले पर जनता अब कांग्रेस की बात नहीं सुनेगी।

शिवराज सिंह ने मनरेगा को बताया भ्रष्टाचार का सागर

शिवराज चौहान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मनरेगा में अनियमितताएं थीं, भ्रष्टाचार था, काम मजदूरों की जगह मशीनों और ठेकेदारों द्वारा किया जाता था। वीबी-जी-रामजी में, इन सभी अनियमितताओं को रोककर, 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार दिया गया और 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये की भारी राशि से विकसित भारत के लिए विकसित गांवों का निर्माण किया गया। इसके साथ ही विलंबित मजदूरी भुगतान पर ब्याज दिया जाएगा। कोई भी कांग्रेस की बात नहीं सुनने वाला है, मनरेगा भ्रष्टाचार का सागर था जिसका अंत हो गया है।”

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डीके शिवकुमार का भाजपा पर आरोप

इस बीच, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भाजपा की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को कथित तौर पर समाप्त कर दिया है, जो ग्रामीण परिवारों को आजीविका सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 100 दिनों के अकुशल मजदूरी कार्य की गारंटी देता था।’मनरेगा बचाओ संग्राम’ की तैयारी के लिए आयोजित एक बैठक में बोलते हुए केपीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के नए निधि-साझाकरण पैटर्न से राज्य सरकारों पर काफी बोझ पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा के लिए इस नई परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करना असंभव होगा, यहां तक ​​कि उन राज्यों में भी जहां वे वर्तमान में सत्ता में हैं।

VB-G RAM G विधेयक में क्या नया है?

गौरतलब है कि 18 दिसंबर 2025 को संसद ने VB-G RAM G विधेयक पारित किया जिसे 21 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। यह कानून ग्रामीण परिवारों के प्रत्येक सदस्य को मौजूदा 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का मजदूरी रोजगार सुनिश्चित करता है, बशर्ते वे अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों।

इस कानून का नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ( MGNREGA ) से बदलकर विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम कर दिया गया है। कानून की धारा 22 के अनुसार, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच निधि बंटवारे का पैटर्न 60:40 होगा जबकि उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर के लिए यह 90:10 होगा।

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