समाजवादी पार्टी की फर्स्ट फैमिली की कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पार्टी की रजत जयंती के मौके पर लखनऊ में हुए जश्न के दौरान भी शिवपाल यादव और अखिलेश यादव अलग-अलग नजर आए। हालांकि राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया और मुलायम सिंह यादव के समधी, लालू प्रसाद यादव ने बिखरते परिवार को एक करने की अलग अंदाज में कोशिश की, लेकिन बात बन नहीं सकी। नाटकीय घटनाक्रम में, अखिलेश और शिवपाल मंच में हाथों में तलवार लिए नजर आए, जो उन्हें मंत्री गायत्री प्रसाद ने स्मारिका के तौर पर दी थी। लालू दोनों के बीच खड़े हुए और उनके हाथ हवा में उठा दिए। इसके बाद उन्होंने अखिलेश से अपने चाचा के पैर छूकर आशीर्वाद लेने के लिए कहा। जैसे ही अखिलेश पैर छूने के लिए नीचे चुके, लालू ने शिवपाल का हाथ खींचकर उसे अखिलेश के सिर पर ‘आशीर्वाद’ देने के लिए रख दिया। लालू की सबसे छोटी बेटी की शादी मुलायम के पड़पोते से हुई है। हालांकि लालू की इस कोशिश के बाद चाचा और भतीजे ने एक-दूसरे पर जुबानी वार किए।
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भीड़ को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा, ”आपने मेरे हाथ में तलवार दे दी, मगर चलाने की इजाजत नहीं देते।” अपनी बारी आने पर शिवपाल और अाक्रामक रहे। उन्होंने कहा, ”मैंने हाल ही में कहा था कि जहां कुछ लोगों को किस्मत से जिंदगी में कुछ मिलता है, कुछ विरासत में सबकुछ पा जाते हैं, कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें कड़ी मेहनत करके भी कुछ नहीं मिलता।” उसके बाद शिवपाल सीएम से मुखातिब हुए और कहा, ”आपको वो पसंद नहीं आया जो मैंने कहा।” बोलते-बोलते शिवपाल भावुक हो गए और कहा कि वह सीएम नहीं बनना चाहते।
अखिलेश द्वारा खुद को कैबिनेट से बाहर किए जाने पर शिवपाल ने कहा, ”मैं कुछ भी त्यागने को तैयार हैं। अगर आप चाहें तो मैं अपना खून भी दे सकता हूं और कुछ नहीं कहूंगा।” उन्हाेंने कहा, ”मैंने सीएम को बताया कि मैंने पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट में अच्छा काम किया, जब मुझे जिम्मेदारी दी गई। मेरे नियंत्रण वाले सिंचाई मंत्रालय में भी अच्छा काम हुआ है।

