सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदने वालों के धन को दूसरे मद में लगाने के मुद्दे पर शुक्रवार को आम्रपाली समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सी एफ ओ) और आंतरिक आॅडिटरों से कड़े सवाल पूछे और आदेश दिया कि कंपनी सी एम डी और इसके दो अन्य निदेशक नोएडा में एक होटल में पुलिस की निगरानी में रहेंगे।
शीर्ष अदालत ने 23 ‘‘मुखौटा कंपनियों’’ पर ध्यान केंद्रित किया जिनके बारे में समूह ने विशेष प्रयोजन वाली कंपनियां होने का दावा किया। न्यायालय ने इन कंपनियों के गठन और बैंक खातों का ब्योरा मांगा। इसने आम्रपाली समूह से कहा कि वह 2008 से कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए गए सभी लैपटॉप, कंप्यूटर और हार्ड ड्राइव फॉरेंसिक विशेषज्ञों को सौंप दे।
मामले की जांच के लिए इन फॉरेंसिक विशेषज्ञों की नियुक्ति न्यायालय ने की है।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्र और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने सी एफ ओ चंदर वाधवा से कड़ी पूछताछ की जिसने पूर्व में फॉरेंसिक आॅडिटरों की पूछताछ के दौरान ‘‘याददाश्त खोने’’ का दावा किया था।
इसने कंपनी के दो आंतरिक आॅडिटरों- अनिल मित्तल और रवि कपूर से भी कहा कि वे समूह से संबंधित सभी दस्तावेज सौंप दें। न्यायालय ने उन्हें चेतावनी दी कि आदेश का पालन न करने पर उन्हें जेल जाना होगा।
अदालत ने समूह के खाते रखने वाले बैंकों को निर्देश दिया कि 2008-18 की अवधि के दौरान के कंपनी के सभी ब्योरे तीन दिन के भीतर फॉरेंसिक विशेषज्ञों को सौंप दिए जाएं।
पुलिस को निर्देश दिया कि वह आम्रपाली के आंतरिक आॅडिटरों से समूह से जुड़े सभी दस्तावेज तीन दिन के भीतर जब्त कर फॉरेंसिक विशेषज्ञों को सौंपे।
शुरू में, फॉरेंसिक आॅडिटर पवन कुमार अग्रवाल ने अदालत को बताया कि उन्होंने पाया है कि घर खरीदने वालों से एकत्र धन समूह की कुछ कंपनियों ने दूसरे मद में लगा दिया और इस काम के लिए कुछ मुखौटा कंपनियां बनाई गईं।
