महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाए जाने वाले दही हाड़ी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बुधवार को अहम फैसला आया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि दही हांडी अनुष्ठान में 18 साल के कम उम्र के बच्चे भाग नहीं लेंगे। साथ ही मटकी फोड़ने के लिए बनने वाला पिरामिड 20 फीट से ऊंचा नहीं होना चाहिए। यह फैसला महाराष्ट्र सरकार की उस गुहार के बाद आया है, जिसमें उसने पिछले हफ्ते अपेक्स कोर्ट से इस मामले में स्पष्टता की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। साल 2014 में 11 अगस्त 2014 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 18 साल से कम के युवक दही हांडी में हिस्सा नहीं ले सकते और इसकी ऊंचाई भी 20 फुट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता स्वाति पाटिल की ओर से दायर अवमानना याचिका के बाद फिर से प्रकाश में आया। पाटिल ने बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश न मामने का दावा करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उस समय बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है जब जन्माष्टमी का त्योहार आ रहा है और दही हांडी उसका अहम हिस्सा है। हालांकि इसे लेकर बहुत खतरा भी है, कई बार लोगों के चोटहिल होने के मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि लोग त्योहार मनाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए।
महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया गया था कि 11 अगस्त 2014 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 18 साल से कम के युवक दही हांडी में हिस्सा नहीं ले सकते और इसकी ऊंचाई भी 20 फुट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। जिसके खिलाफ आयोजकों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी और सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए 12 साल तक के बच्चों को हिस्सा लेने की इजाजत दे दी थी और ऊंचाई के आदेश पर भी रोक लगा दी थी।
Dahi-Handi matter: SC observes children below 18 years should not be allowed to participate
— ANI (@ANI_news) August 17, 2016
