भारतीय सेना ने पिछले 6 साल में 960 करोड़ रुपये का गोला बारूद खरीदा है। सेना की तरफ से की गई इस खरीद को लेकर सेना की एक आंतरिक रिपोर्ट में सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट में खरीदे गए हथियारों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं।

सेना की तरफ से रक्षा मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्टृ में कहा गया है कि सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड से जितने रुपये में खराब गोला बारूद खरीदा गया है उतने में करीब 100 आर्टिलरी गन खरीदी जा सकती थी।  आज तक डॉट इन की रिपोर्ट के मुताबिक जिन हथियारों में कमियां बताई गईं हैं उनमें 23-MM के एयर डिफेंस शेल, आर्टिलरी शेल, 125 MM का टैंक राउंड समेत अलग-अलग कैलिबर की बुलेट्स शामिल हैं।

रिपोेर्ट में कहा गया है कि इन हथियारों की खरीद से न सिर्फ पैसों की बर्बादी हुई है बल्कि मानवीय क्षति भी हुई है। खराब साजो सामान के चलते घटनाओं के दौरान मानवीय क्षति की आवृत्ति एक हफ्ते में एक रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 के बाद से अनुचित गुणवत्ता के हथियारों के चलते  403 घटनाएं हुई हैं। राहत की बात यह है कि इन घटनाओं में कमी देखी गई है।

साल 2014 में 114 घटनाएं हुई थी जबकि 2017 में 53, 2018 में 78 और साल 2019 में 16 ऐसी घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं में 27 जवानों की जान गई थी जबकि 159 जवान घायल हुए थे। मौजूदा वर्ष में 13 घटनाएं हुईं हालांकि राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी जवान की मौत नहीं हुई।

बता  दें कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) का संचालन रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत ही होता है इसी के तहत सेना के लिए गोलाबारूद बनाया जाता है। यह अलग बात है कि पिछले दो सालों में हथियारों की खरीद के लिए प्राइवेट कंपनियों का रुख  किया गया है लेकिन फिलहाल सेना के लिए  हथियार उस स्तर पर प्राइवेट कंपनियों से नहीं खरीदें गए हैं जैसे ओएफबी से खरीदे जाते हैं।