दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को एक आतंकी हमला हुआ था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) इस मामले की जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि इस साजिश का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी एक दूसरे आत्मघाती हमलावर की भर्ती करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो सका, क्योंकि संबंधित व्यक्ति ने सेब की पैदावार के मौसम में अपने परिवार की मदद करने की जरूरत का हवाला देते हुए इस आतंकी साजिश से पीछे हटने का फैसला कर लिया।
आतंकी मॉड्यूल का हुआ पर्दाफाश
श्रीनगर पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उमर नबी द्वारा संचालित एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। नबी वही व्यक्ति था जो 10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोटकों से लदी गाड़ी चला रहा था। इस विस्फोट में 12 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से पूछताछ के दौरान डॉक्टर से आतंकी बने नबी द्वारा अपनाई गई भर्ती की रणनीतियों का खुलासा हुआ है। इसी आधार पर एनआईए ने शोपियां निवासी यासिर अहमद डार को गिरफ्तार किया।
अधिकारियों ने बताया कि नबी ने यासिर डार को एक संभावित आत्मघाती हमलावर के रूप में सफलतापूर्वक कट्टरपंथी बना दिया था, लेकिन पिछले साल अगस्त में हुई एक मुलाकात के दौरान उसने आखिरी समय में इस साजिश से पीछे हटने का फैसला किया। उसने इसके लिए ‘सेब की पैदावार का मौसम’ और घर में मरम्मत का काम होने को कारण बताया। अधिकारियों के अनुसार यासिर डार 2023 से नबी के संपर्क में था। उसने यह भी स्वीकार किया कि नबी का एक पेशेवर डॉक्टर होना उसके प्रभाव में आने का एक बड़ा कारण बना। डॉक्टर होने के कारण उसकी कट्टरपंथी बातें भर्ती किए गए लोगों को अधिक प्रभावशाली और विश्वसनीय लगती थीं।
अधिकारियों ने बताया कि जांच से संकेत मिला है कि नबी केवल आतंकी ही नहीं था, बल्कि रणनीतिक रूप से भर्ती भी करता था। वह ‘प्राइमरी सेल’ के पकड़े जाने पर भी आतंकी अभियान की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सेकेंडरी, स्वतंत्र सेल बना रहा था। जांच के दौरान पुलिस ने एक आरोपी के फोन से एक ‘वॉइस नोट’ भी बरामद किया, जिसमें वह जिहाद के लिए ‘बायत’ (निष्ठा की कसम) ले रहा है।
भर्ती के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल
बीच में ही स्कूल की पढ़ाई छोड़ चुका यासिर डार का नाम पहले भी जांच में सामने आया था, जब उसका एक दोस्त आतंकी संगठनों से जुड़ा था। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि वह सोशल मीडिया टेलीग्राम के जरिए नबी के संपर्क में था और उसे हमेशा बेहतरीन शारीरिक प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए कहा जाता था। अधिकारियों के अनुसार यासिर डार दूसरा संभावित आत्मघाती हमलावर था, जिसे नबी इस आतंकी मॉड्यूल में शामिल करने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने बताया कि नबी कट्टरपंथी था और उसका मानना था कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आत्मघाती हमलावर का होना बेहद जरूरी है।
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