संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा में विमुद्रीकरण के फैसले पर बहस हो रही है। समाजवादी पार्टी के निष्कासित महासचिव व राज्यसभा सांसद प्रो. रामगोपाल यादव ने केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बड़े नोटों को अवैध घोषित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी के फैसले से आम आदमी प्रभावित हुआ है और संकट खड़ा हो गया है। उन्हाेंने कहा, ”ऐसा इमरजेंसी के दौरान नहीं हुआ। आम आदमी भिखारी बन गया है। अगर आप आज गांव जाकर वोट मांगेंगे तो महिलाएं बेलन उठाएंगी और सबक सिखाएंगी।” उन्होंने कहा कि विमुद्रीकरण के फैसले से अमीर या बिजनेस क्लास को कोई प्रभाव नहीं पड़ा, बल्कि गांवों के लोग और महिलाओं पर असर पड़ा है। यादव ने कहा कि ‘जिन घरों में शादियां हैं, वहां नोटबंदी की वजह से बहुत दिक्कत है।’ उन्होंने कहा, ”लोगों के पास दो ही विकल्प हैं, या तो शादी को टालें या फिर तोड़ें। तोड़ने की स्थिति में कई बार लड़की या उसके मां-बाप आत्महत्या कर लेते हैं। इस पर विचार होना चाहिए।” यादव ने कहा, ”लोग विमुद्रीकरण से बेहद खफा हैं। किसानों को बीज और खाद नहीं मिल पा रहा। सबसे ज्यादा परेशानी देश की महिलाओं को उठानी पड़ रही है। प्रधानमंत्री को सोचना चाहिए कि जब उनकी मां को लाइन में लगना पड़ा, तो बाकी लोगों की क्या हालत होगी, यह संकट है।”
राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की। कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के फैसले से पूरी दुनिया में संदेश गया कि भारत की अर्थव्यवस्था ‘काले धन पर चलती है।’ उन्होंने पूछा कि ‘किस कानून ने आपको अधिकार दिया कि हमें अपने अकाउंट से पैसे निकालने पर भी पाबंदी लगा रहे हैं?’
सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार के इस फैसले से कालाधन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि लोग सोने के रूप में कालेधन को व्हाइट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से गरीब लोग ही परेशान हो रहे हैं। अमीर लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा।
दोपहर में तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में कुछ पार्टियों के सांसदों ने मार्च भी निकाला। इसमें टीएमसी, शिवसेना, उमर अब्दुल्ला व आम आदमी पार्टी सांसद भगवंत मान शामिल हुए।

