रेलमंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि रायबरेली में मॉडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) के निगमीकरण को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की चिंताएं ‘भ्रमित, काल्पनिक आशंकाओं’ पर आधारित हैं। गोयल ने गांधी से आग्रह किया कि वह नौकरियां जाने के भय के झांसे में न आएं। गोयल ने गांधी को लिखे पांच पृष्ठों के पत्र में कांग्रेस नेता पर निशाना साधा और कहा कि वह हैरान हैं कि वह नए आधुनिक भारत के मंदिरों की स्थापना के कदम का विरोध कर रही हैं जिन्हें यह नाम जवाहर लाल नेहरूने दिया था। गांधी ने इससे पहले दावा किया था कि सरकार चुपके से मॉडर्न कोच फैक्ट्री के निजीकरण का प्रयास कर रही है जो कि उनके संसदीय क्षेत्र रायबरेली में स्थित है।
गोयल ने दो सितंबर की तिथि वाले पत्र में कहा कि मैं यह बहुत दुख के साथ कह रहा हूं कि कुछ भ्रमित और काल्पनिक चिंताओं के आधार पर आप एमसीएफ, रायबरेली को विकास और विस्तार के अगले स्तर पर ले जाने की हमारी योजना का विरोध कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निगमीकरण से अधिक निवेश और बेहतर प्रौद्योगिकी का प्रोत्साहन होगा और एक ऐसा माहौल बनेगा जो संचालन और नवाचार में दक्षता को बढ़ावा देगा। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप इन पीयू (उत्पादन इकाइयों) के श्रमिकों की आजीविका की सुरक्षा को लेकर किसी तरह के भय में नहीं पड़ें – कोई छंटनी नहीं हो रही है। इसके बजाय रेलवे भर्ती बढ़ा सकता है क्योंकि एमसीएफ दुनिया का सबसे बड़ा कोच निर्माता बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि कारखाने की आधारशिला उनके (सोनिया गांधी) द्वारा 2007 में रखी गई थी जबकि निर्माण 2010 में शुरू हुआ।
मंत्री ने कहा कि यह कहा गया था कि इसमें 1000 कोच बनना निर्धारित था लेकिन यह अपनी पूर्ण क्षमता हासिल करने से बहुत दूर रहा। साल 2011-2014 के दौरान कारखाने ने कपूरथला से लाए गए कुछ कोच पर मामूली काम किया और 375 कोच का नवीनीकरण किया गया जबकि यह एक ऐसी इकाई होनी चाहिए थी जहां कोच का पूरी तरह से निर्माण होता। उन्होंने कहा कि भाजपा के 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद कारखाने को प्राथमिकता दी गई।
रेल मंत्री ने कहा कि जुलाई, 2014 में एमसीएफ को भारतीय रेलवे की निर्माण इकाई घोषित किया गया और एक महीने के भीतर उसने कोच का पूरी तरह से उत्पादन शुरू कर दिया। उसके बाद से उसने लभभग प्रत्येक वर्ष उत्पादन दोगुना किया है। उन्होंने कहा कि 2014-15 में 140 कोच का उत्पादन हुआ, 2015-16 में 285, 2016-17 में 576, 2017-18 में 711 और 2018-19 में 1425 कोच का उत्पादन हुआ। उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए लक्ष्य 2158 कोच का है जो कि मंजूर कोच से दोगुने से अधिक है। उन्होंने कहा कि कारखाने ने गांधी के संसदीय क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित किया जिससे लाखों लोगों को लाभ हुआ। उन्होंने कहा कि एमसीएफ द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से 2018-19 में 667 करोड़ रुपए का सामान खरीदा गया।
