पाकिस्तान में मृत्युदंड का सामना कर रहे कुलभूषण जाधव को अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ एक दीवानी अदालत में अपील दायर करने का अधिकार देने की इजाजत देने के लिए थल सेना कानून में संशोधन की तैयारी कर रहा है। वहां के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से पाकिस्तानी मीडिया में इस आशय की रिपोर्ट आई है। हालांकि, दिन भर चली इस तरह की खबरों को लेकर शाम को पाकिस्तानी फौज ने कहा कि थलसेना कानून में संशोधन नहीं होगा, लेकिन जाधव के मामले में कई और कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
संशोधित कानून में सैन्य अदालतों द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ दीवानी अदालतों में समाधान मांगने की प्रक्रिया की रूपरेखा निर्धारित की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय अदालत के 16 जजों के पीठ ने 17 जुलाई को अपने फैसले में पाकिस्तान की सरकार को कहा कि वह जाधव को राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराए और उसकी सजा को लेकर दोबारा सुनवाई का इंतजाम करे। आइसीजे ने अपने फैसले में कहा था कि पाकिस्तान को जाधव की मौत की सजा की अवश्य ही समीक्षा करनी चाहिए।
जाधव की सजा के खिलाफ भारत ने आइसीजे में अपील की थी। जाधव (49) भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। अप्रैल 2017 में उनके खिलाफ पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत के बंद कमरे में चली सुनवाई के बाद उन्हें जासूसी व आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, भारत का यह कहना रहा है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया था जहां वह नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद कारोबार के सिलसिले में गए थे।
पाकिस्तान ने काफी टाल-मटोल के बाद आइसीजे के निर्देश के तहत दो सितंबर को जाधव को राजनयिक पहुंच प्रदान की थी। पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने जाधव को तीन मार्च 2016 को अशांत बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था। उन्होंने ईरान से कथित तौर पर प्रवेश किया था।
इस बीच, पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने बुधवार को ट्वीट किया कि इंटरनेशनल कोर्ट आॅफ जस्टिस (आइसीजे) के आदेश को लागू करने के लिए पाकिस्तान के आर्मी एक्ट में बदलाव की अटकलें गलत हैं। मामले की समीक्षा और पुनर्विचार के लिए विभिन्न कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इस पर अंतिम नतीजा समय पर साझा किया जाएगा।
