बीजेपी पर होने वाली चर्चाओं में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को ‘चाणक्य’ का दर्जा दिया जाता है। अटल-आडवाणी वाली बीजेपी के दौर में ‘चाणक्य’ की ये उपाधि पार्टी के दिग्गज नेता रहे प्रमोद व्यंकटेश महाजन को दी जाती थी। आज (3 मई) प्रमोद महाजन की पुण्यतिथि है। अपने सगे भाई की गोलियों का शिकार हुए प्रमोद महाजन ने 3 मई 2006 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनका खूनी अंत भारतीय राजनीति के स्याह पक्ष का एक चेहरा है। यकायक इस पर किसी को यकीन नहीं होता कि इतने विशाल व्यक्तित्व वाले नेता को अपने सगे भाई ने मौत की नींद सुला दिया। इसकी चर्चा कर हर कोई सहज नहीं हो सकता है। इसके पीछे साजिश, प्रतिस्पर्धा, तरक्की से जलन जैसे ना जाने कितने मानवीय गुण-अवगुण छिपे हुए हैं।
वो 22 अप्रैल 2006 की एक मनहूस सुबह थी। प्रमोद महाजन अपने घर में थे। उस रोज किसी बात पर उनकी अपने भाई प्रवीण से बहस शुरू हुई। ये बहस 15 मिनट तक चली और उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन ने गोली चला दी। 15 मिनट के इस झगड़े में ऐसा क्या था कि बात फायरिंग तक पहुंच गई, ये कहना मुश्किल है। आखिर प्रमोद महाजन की किस बात से उनके भाई प्रवीण महाजन (जो कि इस दुनिया में अब मौजूद नहीं है) इस कदर खफा हुए कि उन्होंने गोली चला दी? हालांकि प्रमोद महाजन पर तुरंत गुस्सा होने वाली शख्सियत होने (शॉर्ट टैंपर्ड) के आरोप लगे।
पत्र-पत्रिकाओं और अखबारों में अपने बड़े से मुस्कान के साथ छपने वाले प्रमोद महाजन इस आरोप को कुछ हद तक स्वीकार करते हैं। चर्चित टेलिविजन शो ‘आपकी अदालत’ में जब उनपर शॉर्ट टैंपर्ड होने का आरोप लगाया गया तो उन्होंने कहा, “अगर आपका ये आरोप है कि मैं शॉर्ट टैंपर्ड हूं, या मुझे जल्दी गुस्सा आता है, तो मैं समझता हूं कि हां, ये दोष मेरे में है, इस दोष को कम करने की कई बार मैं कोशिश करता हूं, लेकिन कभी-कभी वह उभर के आ जाता है।”
इंटरव्यू में प्रमोद महाजन आगे बताते हैं कि वह गुस्सैल स्वभाव के नहीं हैं। वो कहते हैं, “मेरा बेटा है, बेटी है, कुछ दिन पहले मेरी बेटी को बेटा हुआ है, मैं नाना बन गया हूं, मुझे ऐसा लगता है कि मैंने मेरे बच्चों पर आजतक हाथ नहीं उठाया है, एक बार मैंने मेरे बड़े बेटे को आठवीं कक्षा में फेल हुआ था इसलिए एक चांटा मारा था, और आज जब भी मैं पलटकर याद करता हूं तो आज आंखों में आंसू आ जाते हैं, कि मारना नहीं चाहिए था। क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि हम बच्चों को इसलिए मारते हैं क्योंकि वो हमको मार नहीं पाते हैं। जब भी कुछ गलती हो तो समझाना चाहिए, इसलिए मैंने मेरे बच्चों के साथ हाथ उठा कभी पीटा नहीं, थोड़ा बहुत गुस्सा हुआ। लेकिन कभी स्पर्श नहीं किया।”
इस शो में बीजेपी नेता का कोमल पक्ष सामने उभरकर आया है। लेकिन उनकी मौत एक खूनी विवाद में हुई। प्रवीण महाजन ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने अपने भाई को 0.32 ब्राउनिंग पिस्टल से चार गोलियां मारी थीं। एक गोली निशाना चूक गई लेकिन बाकी तीन गोलियां उनके शरीर को छेद गईं। वह 13 दिन अस्पताल में भर्ती रहे, उन्हें बचाने लंदन से डॉक्टर को बुलाया गया, लेकिन मेडिकल साइंस का कोई चमत्कार भाई द्वारा उन्हें दिये गये जख्म को नहीं भर सका।

