जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में काम करने वाले 138 मजदूर सोमवार को जम्मू-तवी एक्सप्रेस से कोलकाता लौट आए। इसमें असम के पांच मजदूर शामिल हैं। कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम कश्मीर से लौटने वाले मजदूरों को लेने के लिए कोलकाता रेलवे स्टेशन पर मौजूद थे। एक अधिकारी के मुताबिक कश्मीर में आतंकवादी हमले में मारे गए राज्य के मजदूरों के बाद राज्य सरकार ने वहां से लौटने वालों के लिए ट्रेन में खास डिब्बे का इंतजाम किया था।
कोलकाता स्टेशन से मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के बाकी पेज 8 पर लिए राज्य सरकार की ओर से पांच बसों का इंतजाम किया गया। मालूम हो कि ज्यादातर मजदूर बीरभूम, जलपाईगुड़ी और दक्षिण दिनाजपुर जिले के रहने वाले हैं। कश्मीर के कुलगाम में मुर्शिदाबाद जिले के बहालनगर के पांच बंगाली मजदूरों की हत्या के बाद राज्य के श्रमिक यहां लौटना चाह रहे थे। आतंकवादी हमले में घायल एक मजदूर का इलाज चल रहा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कश्मीर में छह मजदूरों के मारे जाने के बाद ही वहां से अपने राज्य के मजदूरों को निकालकर वापस बुलाने का एलान किया था।
इस साल फरवरी में हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर रहे रियाज नाइकू ने एक ऑडियोटेप जारी किया था, जिसमें उसने खौफनाक नतीजों की चेतावनी दी थी। उसने प्रवासी मजदूरों और गैर-स्थानीय कारोबारियों को धमकी दी थी कि वे फौरन कश्मीर छोड़कर चले जाएं। आतंकवादी जब अपने सरगना की धमकियों को साकार करने में जुटे, तब कश्मीर घाटी से पलायन शुरू हो गया। प्रवासियों में अब डर अब पूरी तरह हावी है। रोजगार पर आतंक के हावी होने की यह घटना जम्मू-कश्मीर के 30 साल के हालिया अतीत में बड़ा बदलाव रहा। प्रवासी मजदूरों को और गैर-स्थानीय कारोबारियों को आतंकियों ने कभी निशाना नहीं बनाया था।
बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल, झारखंड या पूर्वोत्तर से हर साल घाटी में काम करने के लिए मजदूर पहुंचते रहे। जब आतंकवाद तेजी पर था, तब भी उन्हें निशाना नहीं बनाया गया। वे कश्मीरी मुसलमानों के साथ रहते। किराए पर उन्हें घर मिल जाता। दक्षिण कश्मीर के गांवों में सेब के बगीचे और धान के खेत हैं। इन इलाकों में प्रवासी मजदूरों की अच्छी खासी मांग रही है।
लेकिन हाल में पश्चिम बंगाल के छह मजदूरों की हत्या के बाद सब-कुछ बदल गया। इससे पहले पुलवामा और शोपियां में ट्रक ड्राइवर मोहम्मद शरीफ, छत्तीसगढ़ के मजदूर सेठी कुमार और पंजाब के फल कारोबारी चरनजीत सिंह की हत्याओं से खौफ बढ़ा। इन हत्याओं के बारे में गृह मंत्रालय ने भी रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये सभी दशकों से वहां के सेब कारोबारियों से जुड़े थे। पहले कभी कोई दिक्कत नहीं आई। इन आतंकी वारदातों के कारण घाटी की प्रवासी आबादी के बीच दहशत की लहर फैली है, जिससे सेब के व्यापार को जबरदस्त झटका लगा है। दर्जनों गैर-कश्मीरी ट्रक वाले भाग गए, जो दक्षिण कश्मीर से सेबों की ढुलाई के लिए पहुंचे थे।
आतंकी घटनाओं में वांछित हिज्बुल मुजाहिदीन के उग्रवादियों सईद नावेद मुश्ताक (उर्फ नावेद बाबू) और शोपियां के राहिल मागरे की पहचान की गई है और उनकी तलाश जारी है। नावेद पुलिस का पूर्व जवान है। वह 2017 में बडगाम से चार राइफलों के साथ भागकर हिज्बुल में शामिल हो गया था। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, हमने भरोसा कायम करने और प्रवासी मजदूरों का कश्मीर घाटी से पलायन रोकने के लिए इंतजाम शुरू किए हैं। लेकिन ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। पहले ट्रक चालक भागे, फिर बिहार के 22 मजदूरों का जत्था भाग गया। अब बंगाल के 138 मजदूर वापस चले गए हैं।

