Ahmedabad News: अहमदाबाद की एक मजिस्ट्रियल कोर्ट ने एक पुलिस कांस्टेबल को गुजरात निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया और सजा सुनाई है। वह 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े भाई सोमभाई मोदी के आवास पर सुरक्षा ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में पाया गया था। अदालत ने लक्ष्मणसिंह परमार को एक साल के साधारण कारावास और 1000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (अहमदाबाद रूरल) पीके पंड्या की अदालत ने इस संबंध में 21 जनवरी को फैसला सुनाया।

अब पूरे मामले की बात करें तो यह नवंबर 2016 का है। उस वक्त परमार अहमदाबाद में रानीप इलाके में सोमाभाई के आवास पर सिक्योरिटी ड्यूटी में तैनात था। इस मामले में शिकायतकर्ता आरएस तोमर उस समय शाहिबाग इलाके में पुलिस हेडक्वार्टर में पुलिस इंस्पेक्टर थे। 15 नवंबर 2016 को तोमर अचानक निरीक्षण के लिए सोमाभाई के आवास पर गए, जहां परमार नशे की हालत में पाया गया।

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तोमर ने दर्ज कराई थी शिकायत

तोमर कांस्टेबल को रानीप पुलिस स्टेशन ले गया और उसके खिलाफ निषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई। कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया और जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद उस पर आपराधिक मुकदमा चलाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने 12 गवाहों और अलग-अलग दस्तावेजों की जांच की। इसमें फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की एक रिपोर्ट भी शामिल थी। इसके अनुसार परमार के ब्लड सैंपल में 0.0747 प्रतिशत एथिल अल्कोहल मिला।

कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

अदालत ने परमार को दोषी ठहराते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने मामले को संदेह से परे साबित कर दिया है। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा, “इस मामले में आरोपी द्वारा किया गया अपराध समाज के खिलाफ है और शराबबंदी कानून का उद्देश्य लोगों को शराब के सेवन से रोकना है। गुजरात में शराबबंदी इसलिए लागू की गई है क्योंकि शराब पीना एक सामाजिक बुराई है, जिसके कारण अक्सर शराब पीने वाले के आसपास रहने वाले लोगों को मानसिक कष्ट झेलना पड़ता है। इसलिए, आरोपी के विरुद्ध लगाया गया अपराध गंभीर प्रकृति का माना जा सकता है।”

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