नागरिकता कानून के विरोध में हुई हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नाराजगी जताई। उन्होंने उपद्रवियों को नसीहत देते हुए पूछा, ‘वे लोग खुद से सवाल पूछें कि क्या उनका यह रास्ता सही था।’ उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों को लेकर कहा कि सरकार आगे भी बड़े और कड़े फैसले लेती रहेगी।
प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान नागरिकता संशोधन कानून, रामजन्मभूमि मामला और अनुच्छेद 370 का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार विरासत में मिली सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं के समाधान का निरंतर प्रयास कर रही है और उसने चुनौतियों को चुनौती देने का कोई मौका नहीं छोड़ा है।
प्रधानमंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हम चुनौतियों को चुनौती देने का स्वभाव लेकर निकले हैं। प्रधानमंत्री ने हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को नसीहत दी और अधिकार के साथ कर्त्तव्य याद दिलाए। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘यूपी में जिस तरह कुछ लोगों ने विरोध-प्रदर्शन के नाम पर हिंसा की, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, वे अपने घरों में बैठकर खुद से सवाल पूछें कि क्या उनका यह रास्ता सही था? उनकी प्रवृत्ति योग्य थी?’ उन्होंने कहा, ‘जो कुछ जलाया गया, बर्बाद किया गया क्या वह उनके बच्चों के काम आने वाला नहीं था?’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हिंसा में जिन लोगों की मृत्यु हुई, जो सामान्य नागरिक जख्मी हुए, जो पुलिसवाले जख्मी हुए, उनके और उनके परिवारवालों के प्रति सोचें कि क्या बीतती होगी। झूठी अफवाहों में आकर हिंसा करने वालों को, सरकारी संपत्ति तोड़ने वालों को मैं कहना चाहूंगा कि बेहतर सड़क, बेहतर ट्रांसपोर्ट, उत्तम सीवर लाइन नागरिकों का हक है, इसको सुरक्षित रखना, साफ-सुथरा रखना भी नागरिकों का ही दायित्व है। हक और दायित्व को हमें साथ-साथ याद रखना है।’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार विरासत में मिली समस्याओं को सुलझा रही है। उन्होंने कहा, ‘अनुच्छेद 370 कितनी पुरानी बीमारी थी। कितनी कठिन लगती थी, हमें विरासत में मिली थी। हमारा दायित्व था कि कठिन से कठिन चीजों को सुलझाने का भरसक प्रयास करें। सब कुछ बहुत आराम से हुआ। सबकी धारणाएं चूर-चूर हो गईं। राम जन्मभूमि के इतने पुराने मामले का शांतिपूर्ण समाधान हुआ। अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता की गरिमा देने का रास्ता, ऐसी अनेक समस्याओं का हल इस से निकाला गया है।’
इससे पहले उन्होंने लोकभवन परिसर में स्थित पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 25 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया और पुष्पांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय का शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद के वर्षों में हमने सबसे ज्यादा जोर अधिकारों पर दिया है, लेकिन अब हम आजादी के 75 साल पूरे होने की ओर बढ़ रहे हैं। समय की मांग है कि अब हम अपने कर्तव्यों पर भी उतना ही बल दें।
सरकार का दायित्व है कि वह पांच साल नहीं बल्कि पांच पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए काम करने की आदत बनाए। उत्तर प्रदेश सरकार इस दायित्व को निभाने का भरपूर प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सुशासन का एक ही मंत्र है, सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास। हमारा प्रयास रहा है कि सरकार से सत्ता सुख को निकालकर सेवा के संस्कार गढ़े जाएं। यह तभी संभव है जब आम आदमी के जीवन में सरकार का दखल कम से कम रखने की कोशिश हो। हमारा प्रयास है कि सरकार अटकाने, उलझाने के बजाय सुलझाने का माध्यम बने।

