शिव सेना के सांसद मंगलवार (22 नवंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए नई दिल्ली आए थे। सांसद नोटबंदी के मुद्दे पर बात करने के लिए आए थे और उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि जिलों में बने सहकारी बैंक में पुराने नोट चलाने की इजाजत दी जानी चाहिए। अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, लगभग 10 मिनट चली उस मीटिंग में पीएम मोदी ने शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे का नाम लेकर उन सांसदों को एक संदेश दिया। मोदी ने कहा, ‘मेरे मरने के बाद जब मैं ऊपर जाकर बाल ठाकरे से मिलूंगा तो कह पाउंगा कि मैंने आम लोगों के लिए कुछ किया। लेकिन आप लोग भी ऐसा कर पाएंगे या नहीं, यह मुझे नहीं पता।’ मोदी ने शिव सेना द्वारा ममता बनर्जी के साथ मिलकर नोटबंदी के लिए प्रदर्शन करने पर भी बात की। शिवसेना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ एनडीए सरकार के खिलाफ राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया था। मार्च नोटबंदी के खिलाफ था।
मोदी ने शिवसेना के सांसदों से यह भी कहा कि कि वह चाहे सरकार का कितना भी विरोध करें लेकिन अंत में उन्हें साथ ही रहना है। पीएम मोदी की बात का जवाब देते हुए शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई में कहा, ‘अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो मैं बालासाहेब का आदर करने के लिए उनका शुक्रिया करता हूं। लेकिन आम लोगों से जुड़े कई सवाल हैं जिनका जवाब तो उन्हें देना होगा। अगर वह उन लोगों की परेशानी को भी सुलझा देते हैं तो बालासाहेब भी खुश होंगे। ‘
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा, ‘आपको उन लोगों को देशभक्ति सिखाने की जरूरत नहीं है जो व्यथित हैं और चुपचाप कतारों में खड़े हैं। उनकी मेहनत की कमाई का देश में सभी कार्यों के लिए इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में आपको (भाजपा को) अपनी मर्जी और सुविधा के हिसाब से लोगों को देशभक्त या राष्ट्रदोही करार नहीं देना चाहिए।’’ इसके अलावा सेना के मुखपत्र ‘‘सामना’’ में कहा गया कि नोटबंदी के कदम से ‘‘वास्तविक’’ काला धन तो बाहर नहीं आया बल्कि सरकार भूख, महंगाई और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने में कामयाब जरूर हो गई।
