भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि अब पुराने नोट एक बार ही बदलवाएं जा सकते हैं। पहले था कि 4500 रुपए के पुराने नोट एक आदमी एक दिन में बदलवा सकता है। लेकिन अब एक बार पुराने नोट बदलवाए जाने के बाद, वह व्यक्ति दोबारा से पुराने नोट नहीं बदलवा सकता। इसके लिए उसे अपने पुराने नोट खाते में जमा कराने होंगे। इसके बाद आप चेक के जरिए अपने नोट निकाल सकते हैं। आरबीआई का यह फैसला नोट बदलने जा रहे लोगों की ऊंगली पर स्याही का निशान लगाने के फैसले के बाद लिया गया है। कुछ रिपोर्ट्स आई थीं कि लोग बैंक की अलग-अलग ब्रांच से जाकर नोट बदलवा रहे हैं। इसके बाद यह फैसला लेना पड़ा। आरबीआई ने सभी बैंकों को यह लागू करने का निर्देश दिए हैं। नोटबंदी को लेकर बुधवार को संसद में भी बहस देखने को मिली। संसद में विपक्षी दलों ने नोटबंदी के फैसले को लेकर केंद्रीय सरकार पर निशाना साधा।

बता दें, आम लोगों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अप्रचलित नोटों को बदलवाने वालों की ऊंगली पर अमिट स्याही लगाने तथा जन धन खातों में संदिग्ध जमाओं की निगरानी करने का फैसला किया है। सरकार ने यह कदम नोटों की अदला बदली करवाने में कई गिरोहों के सक्रिय होने की रपटों के बाद उठाया है। ऐसी रपटें हैं कि ऐसे गिरोह के सदस्य बार-बार कतारों में लगकर नोट बदलवा रहे हैं। इससे वास्तविक जरूरतमंदों को परेशानी हो रही है। देशभर में बैंक शाखाओं में बुधवार को कई स्थानों पर एक-एक किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।

गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार यानी 16 नवंबर से शुरू हुआ। केंद्र सरकार द्वारा 8 नवंबर को विमुद्रीकरण के फैसले के बाद इस सत्र के हंगामेदार होने के आसार सही साबित हुए। लोकसभा को जहां पूर्व सदस्‍यों को श्रद्धांजलि दिए जाने के बाद स्‍थगित कर दिया गया, वहीं राज्‍यसभा में विपक्ष सत्‍ता पक्ष पर हमलावर रही। कांग्रेस, बसपा, सपा की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी को चर्चा के दौरान सदन में बुलाने की मांग उठी। कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने मोदी सरकार पर निशाना सा‍धा। उन्‍होंने कहा कि नोटबंदी के फैसले से पूरी दुनिया में संदेश गया कि भारत की अर्थव्‍यवस्‍था ‘काले धन पर चलती है।’ उन्‍होंने पूछा कि ‘किस कानून ने आपको अधिकार दिया कि हमें अपने अकाउंट से पैसे निकालने पर भी पाबंदी लगा रहे हैं?’

मायावती ने कहा कि नोटबंदी का मुद्दा संवदेशनील है इसलिए पीएम को सदन में चर्चा के वक्‍त मौजूद रहना चाहिए। इस पर नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने भी पीएम को बुलाए जाने की मांग कर दी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आश्‍वासन दिया कि वह इस बारे में बात करेंगे।