धन की कमी के कारण सेना द्वारा अस्थायी भत्तों पर रोक लगाने की खबरों के बीच रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि धन की कमी स्थायी नहीं है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त धन मुहैया कराया जाएगा। अस्थायी भत्ते अधिकारियों को दौरे एवं प्रशिक्षण के उद्देश्य से की गई यात्राओं के लिए दिए जाते हैं।
सेना में 13 लाख जवान हैं और कम से कम एक हजार अधिकारी हर समय यात्राओं पर अथवा पाठ्यक्रमों में हिस्सा लेने, सम्मेलनों में जाने या अभ्यासों में हिस्सा लेने सहित अन्य तरह की ‘‘अस्थायी ड्यूटी’’ पर होते हैं। खबरों पर प्रतिक्रिया जताते हुए रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सभी मदों में पर्याप्त धन आवंटित किया गया हैं जिसमें अस्थायी एवं स्थायी ड्यूटी मद में आवंटित धन भी शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया, ‘‘कभी-कभार किसी विशेष मद में आवंटित धन वास्तविक खर्च से कम पड़ सकता है। ये कमी अस्थायी हैं और नियमित पुर्निवनियोजन के माध्यम से इनका हल निकाला जाता है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त धन मुहैया कराया जाएगा।’’
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही एक अधिसूचना जारी होने के बाद सोमवार (4 फरवरी, 2019) सशस्त्र बलों में खूब हंगामा हुआ था। दरअसल प्रिंसिपल कंट्रोलर ऑप डिफेंस अकाउंट (PCDA) ने घोषणा की कि धन की कमी के चलते बीट, असाइनमेंट और पोस्टिंग पर जाने वाले सैन्य अधिकारियों की प्रक्रिया पर दावा अब और मान्य नहीं होगा। PCDA (अधिकारियों) ने कहा कि धन की कमी के चलते अस्थाई ड्यूटी और स्थाई ड्यूटी के अधिकारियों को टीए/डीए (यात्रा भत्ता), एडवांस और क्लेम को संबंधित प्रमुखों के तहत पर्याप्त धन प्राप्त होने तक संसाधित नहीं किया जा सकता। PCDA रक्षा मंत्रालय के तहत आता है।
जानना चाहिए की अधिसूचना जारी होने से सेना में खासी नाराजगी बढ़ गई, जिसमें करीब 42,000 अधिकारियों के अलावा 12 लाख जवाब तैनात हैं। मामले में एक सैन्य अधिकारी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ये संभावित रूप से सेना के दिन प्रतिदिन के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए किसी भी समय अस्थाई ड्यूटी पर 50 फीसदी से अधिक अधिकारियों को बीट में जाने का काम सौंपा गया है।
भाषा के इनपुट के साथ।
