S Jaishankar News: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के दो दिन बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत के अच्छे पड़ोसियों और बुरे पड़ोसियों के बारे में बात की। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पड़ोस के प्रति हमारा दृष्टिकोण व्यावहारिक है।

चेन्नई के आईआईटी मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एस जयशंकर ने कहा, “हमारे पड़ोसी भी बुरे हो सकते हैं। दुर्भाग्य से, हमारे भी हैं। जब हमारे पड़ोसी बुरे हों, उदाहरण के लिए पश्चिम में स्थित हमारे पड़ोसी को देखें, अगर कोई देश जानबूझकर, लगातार और बिना पश्चाताप किए आतंकवाद को जारी रखने का फैसला करता है, तो हमें आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है। हम उस अधिकार का प्रयोग करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “हम उस अधिकार का प्रयोग कैसे करते हैं, यह हम पर निर्भर है। कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए। हम अपनी रक्षा के लिए जो भी करना होगा, वह करेंगे।” उन्होंने कहा, “कई साल पहले हमने जल बंटवारे की व्यवस्था पर सहमति जताई थी, लेकिन दशकों तक आतंकवाद जारी रहने पर अच्छे पड़ोसी का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। अच्छे पड़ोसी का कोई अस्तित्व नहीं रहता, तो उसके लाभ भी नहीं मिलते। आप यह नहीं कह सकते, ‘कृपया मेरे साथ पानी साझा करें, लेकिन मैं आपके साथ आतंकवाद जारी रखूंगा।’ यह समझौता संभव नहीं है।”

हमें कई तरह के पड़ोसी मिले हैं- जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “मैं दो दिन पहले ही बांग्लादेश में था। मैं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने गया था। हमें कई तरह के पड़ोसी मिले हैं। अगर आपका कोई पड़ोसी आपके साथ अच्छा व्यवहार करता है या कम से कम आपको नुकसान नहीं पहुंचाता है, तो आपकी स्वाभाविक प्रवृत्ति उस पड़ोसी के प्रति दयालु होने और उसकी मदद करने की होती है। अगर पड़ोसी को कोई समस्या है, तो आप किसी न किसी तरह से उसकी मदद करना चाहेंगे। कम से कम, आप उससे नमस्कार करेंगे, दोस्ती और संबंध बनाने की कोशिश करेंगे, और एक देश के रूप में हम यही करते हैं।”

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “जब आप अपने पड़ोस को देखते हैं, तो जहां भी अच्छे पड़ोसी होने का भाव होता है, भारत निवेश करता है, भारत मदद करता है, भारत साझा करता है। हम कोविड के बारे में बात कर रहे थे। हमारे ज्यादातर पड़ोसियों को भारत से टीकों की पहली खेप मिली। कुछ पड़ोसियों ने बहुत ही असाधारण तनाव का सामना किया, जिनमें से एक उदाहरण श्रीलंका था और हमने वास्तव में 4 अरब डॉलर के पैकेज के साथ उनकी मदद की, उस समय जब आईएमएफ के साथ उनकी बातचीत बहुत धीमी गति से चल रही थी।”

बांग्लादेश में चुनाव के लिए शुभकामनाएं देता हूं- जयशंकर

एस जयशंकर ने आगे लिखा, “हमारे ज्यादतर पड़ोसियों को यह एहसास है कि भारत की बढ़ोतरी आज एक उत्थानकारी लहर है। अगर हमारा विकास होता है, तो हमारे सभी पड़ोसी भी हमारे साथ विकसित होंगे। मुझे लगता है कि यही मैसेज मैंने बांग्लादेश को भी दिया। वे अभी अपने चुनावों की ओर बढ़ रहे हैं। हम उन्हें चुनाव के लिए शुभकामनाएं देते हैं और आशा करते हैं कि हालात सामान्य होने के बाद, इस क्षेत्र में पड़ोसी देशों के बीच सौहार्द की भावना बढ़ेगी।”

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