राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार को कहा है कि उसने दिल्ली बम धमाकों के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी उमर नबी के करीबी सहयोगी हैं। डॉ. उमर नबी विस्फोटकों से भरी कार चला रहा था। इस विस्फोट में 12 लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे। यह घटना 10 नवंबर की शाम को हुई थी।
विस्फोट के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मुजम्मिल गनई, अदील राथर और शाहीना सईद के साथ-साथ मौलवी इरफान अहमद वागे को गिरफ्तार कर लिया था। एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इन सभी ने आतंकवादी हमले में अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें कई निर्दोष लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे।’’
एनआईए ने 11 नवंबर को आधिकारिक तौर पर इस मामले को अपने हाथों में लिया था। एनआईए पहले ही दो लोगों आमिर राशिद अली और जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार कर चुकी है।
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वानी को तब गिरफ्तार किया गया जब यह पता चला कि उमर नबी उसे आत्मघाती हमलावर बनने के लिए उकसाने की कोशिश कर रहा था। हालांकि वह इसके लिए तैयार नहीं हुआ लेकिन उस पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए सक्रिय सदस्य के तौर पर शामिल होने की सहमति देने का आरोप है।
गिरफ्तार किए गए इन लोगों पर आरोप है कि वे जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा उत्तर प्रदेश और हरियाणा के सहयोगियों के साथ मिलकर पकड़े गए सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के केंद्र में थे।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी के 200 कर्मचारी जांच के घेरे में
अल-फलाह यूनिवर्सिटी के 200 से अधिक डॉक्टर और कर्मचारी जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं। सुरक्षा एजेंसियां अल-फलाह यूनिवर्सिटी में लगातार जांच कर रही हैं, जिससे यूनिवर्सिटी के छात्रों और कर्मचारियों में चिंता बढ़ गई है।
यूनिवर्सिटी के कई कर्मचारी बुधवार को अपने सामान को गाड़ियों में भरकर गेट से बाहर निकलते देखे गए। यूनिवर्सिटी के सूत्रों के अनुसार, वे छुट्टी लेकर अपने घर लौट रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां विस्फोट के बाद यूनिवर्सिटी छोड़ने वाले लोगों की संख्या का पता लगा रही हैं और उनकी पहचान करने की कोशिश कर रही हैं। उन्हें शक है कि इनमें से कई लोग आतंकवादियों से जुड़े थे।
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मोबाइल से डिलीट किया डेटा
सूत्रों ने बताया कि कई लोगों ने अपना मोबाइल डेटा डिलीट कर दिया है और इसकी भी जांच की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि हॉस्टल और यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर रहने वाले छात्रों के कमरों की पुलिस द्वारा तलाशी ली जा रही है और एक हजार से अधिक लोगों से पूछताछ की गई है।
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