भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की अगली चाल चलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं से सख्त लहजे में कहा कि चुनाव में रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के लिए दबाव न बनाएं। दूसरे, राजनीतिक दलों की फंडिंग में शुचिता आनी चाहिए। इसकी शुरुआत भारतीय जनता पार्टी करे और चुनावी चंदे में पारदर्शिता को लेकर सक्रिय हो जाए। भाजपा की राष्ट्रीय कायर्कारिणी की बैठक के दूसरे और आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पार्टी को नसीहत तो दी ही। उन्होंने भाजपा की जनहितैषी छवि गढ़ने पर जोर दिया और इसके लिए कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर सक्रिय होने का आह्वान किया।
पांच राज्यों में होने वाले चुनाव को लेकर मोदी ने पार्टी के नेताओं को नसीहत दी और कहा कि रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के लिए दबाव न बनाएं। संगठन को सही लगेगा तो टिकट मिलेगा। बताते चलें कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में कई बड़े नेताओं के अपने रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के लिए संघ के पदाधिकारियों से पैरवी कराने की खबरें आई थीं। मोदी ने कहा, ‘चुनाव में अपने रिश्तेदारों, भाई, भतीजों, बेटे, बेटियों को टिकट देने के लिए दवाब नहीं बनाएं। संगठन को उचित लगेगा तो टिकट दिया जाएगा। सभी को चुनाव में मिलकर काम करना है और सभी पांच राज्यों में जीत पक्की बाकी पेज 8 पर
करनी है। कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा कि वे हवा के रुख को मोड़ते हैं। आलोचना से हमें बल मिलता है। कार्यकर्ताओं से जानकारी मिलती है तो हम और प्रभावी ढंग से शासन करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार सबसे बड़ी बुराई है। उन्होंने कहा कि गरीब और गरीबी सिर्फ चुनाव जीतने के माध्यम नहीं है। गरीब सिर्फ वोट के साधन नहीं हैं। यह सेवा का मौका है। गरीब की सेवा प्रभु का सेवा है। गरीबी को परास्त करने की ताकत गरीबों के पास है। हमारे सारे कार्यक्रम गरीबों पर केंद्रित हैं। कुछ लोग लाइफस्टाइल की चिंता करते हैं। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। हमारी चिंता है कि गरीबों और वंचितों को कैसे गुणवत्तापूर्ण जीवन मिले। राजनीति में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि राजनीतिक फंडिग में शुचिता आनी चाहिए। भाजपा इस दिशा में सक्रियता से भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा, ‘मैं गरीबी में जन्मा हूं और गरीबी को जिया हूं। आलोचनाओं का स्वागत कीजिए और आरोपों से घबराइए नहीं। आपके अंदर की सच्चाई आपको अच्छे काम करने से नहीं रोकेगी।’
प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करंसी का अनियंत्रित विस्तार भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी जननी है। बेनामी संपत्ति को सबसे अधिक मजबूती कैश से मिलती है। नोटबंदी के पीछे देश के 125 करोड़ लोग खड़े हैं। देश के गरीबों ने नोटबंदी के इस अहम निर्णय को स्वीकारा है। मोदी ने दावा किया कि तकलीफ होने के बावजूद देश के लोगों ने इस बदलाव को स्वीकार किया है।
