गरीबी इंसान को कुछ भी करने पर मजबूर कर देती है चाहे वह गलत ही क्यों न हो। एक मां को गरीबी ने इतना मजबूर कर दिया कि उन्हें अपने नवजात को कथित तौर पर दरगाह पर छोड़ना पड़ा। मामला मुंबई के वर्ली कहा है यहां हाजी अली दरगाह में 26 जून को पेशे से सेक्स वर्कर महिला ने अपने तीसरे बच्चे को लावारिस छोड़ दिया। गिरफ्तारी के बाद महिला ने कहा है कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह अपने दो बच्चों का पेट पालने में असमर्थ है ऐसे में तीसरे बच्चे से उनकी दिक्कतें और ज्यादा बढ़ रही थीं। हालांकि पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस पूरे मामले को सुलझा लिया।

दरअसल महिला के दरगाह में बच्चे को छोड़ते ही वहां पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाली तो उन्हें बच्चे के साथ एक महिला दिखी। इसके बाद पुलिस ने महिला की तलाश शुरू कर दी। काफी मशक्कत के बाद 26 वर्षीय महिला को ढूंढकर गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान थाने ले जाकर पूछताछ की गई तो महिला ने अपनी मजबूरी और गरीबी का हवाला देते हुए कहा कि उनके पास कोई और विकल्प मौजूद नहीं था।

बेबस मां कहती हैं ‘मेरे पास बच्चे को लावारिस छोड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। यह मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल फैसला था। बच्चे को दरगाह में छोड़ने के एक घंटे बाद मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ। मैं जब वापस उस जगह पहुंची तो देखा वहां पुलिस पहुंच चुकी है। मैं डर गई और वहां से चली आई।’

वहीं इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में महिला ने बताया कि तीन महीने पहले पति उन्हें तीन बच्चों के साथ अकेला छोड़कर अलग हो गए। वहीं पुलिस ने बताया कि महिला का डीएनए टेस्ट करवाया जा रहा है जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि क्या वह बच्चे की जैविक मां (बॉयलोजिकल मदर) है या नहीं। जून महीने के अंत में पुलिस को सूचना मिली थी कि दरगाह में एक बच्चा लावारिस हालत में पड़ा है। जिसके बाद पुलिस ने धारा 317 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

महिला ने कहा है कि ‘पति के अलग होने के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है। जहां मैं रहती हूं उस कमरे का किराया 250 रुपए है लेकिन मैं इसे भरने में असमर्थ हूं। मकान मालिक ने मुझे घर से बाहर करने की चेतावनी दी है।’

महिला की वित्तीय हालात को देखने के बाद एनजीओ ‘प्रेरणा’ ने उनके दो बच्चों की देखरेख का जिम्मा उठाया है। एनजीओ वर्कर मुग्धा दांडेकर के मुताबिक बच्चे दिन में स्कूल जाते हैं और रात में एनजीओ के ऑफिस में रहते हैं। एनजीओ में ऐसे ही 50 बच्चों की देखभाल की जा रही है। इन बच्चों की मां कमर्शियल सेक्स वर्कर्स हैं। स्कूल के बाद बच्चे एनजीओ में आते हैं और थोड़ी देर पढ़ाई करते हैं और फिर टेलिविजन देखते हैं और सोने चले जाते हैं।’