प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्‍य मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से जुड़े एक मुस्लिम संगठन मुस्लिम राष्‍ट्रीय मंच (एमआरएम) को कहा है कि वह कश्‍मीरी छात्रों को कम उम में ही ‘पकड़’ लें ताकि उन्‍हें बाद में ‘बर्बाद’ होने से रोका जा सके। एमआरएम द्वारा कश्‍मीरी छात्रों के लिए आयोजित कॉन्‍फ्रेंस में सिंह ने वहां मौजूद छात्रों के संदर्भ में कहा, ”कश्‍मीरी युवा अब जाग चुके हैं और समस्‍या सिर्फ उस पीढ़ी की है जिससे मैं आता हूं। यह हमारी जिम्‍मेदारी है कि इन नौजवानों को बर्बाद न होने दें।” वरिष्‍ठ आरएसएस नेता और एमआरएम संरक्षक इंद्रेश कुमार की तरफ इशारा करते हुए सिंह ने कहा, ”हमें इन बच्‍चों को तभी पकड़ लेना चाहिए जब वे कक्षा 8…10 में हों क्‍योंकि बाद में उन्‍हें भटकाया जाता है। पहली गलतफहती उनके अभिभावक होते हैं, बाद में (उनमें) कंफ्यूजन पैदा होती है।” इंद्रेश कुमार ने कहा कि कॉन्‍फ्रेंस में दिखाया कि ”हर कश्‍मीरी… दिल से भारतीय है… जो शांति चाहता है संघर्ष नहीं।” उन्‍होंने कहा कि इस कार्यक्रम करा संदेश था कि ‘कश्‍मीर भारतीयों का है और भारत कश्‍मीरियों का। कश्‍मीर और भारत कभी अलग नहीं थे और न कभी होंगे।”

इस कॉन्‍फ्रेंस में राजस्‍थान, नोएडा और दिल्‍ली के विभ‍िन्‍न शैक्षिक संस्‍थानों में पढ़ने वाले करीब 300 कश्‍मीरी छात्र शामिल हुए थे। गृहमंत्री राजनाथ सिंह कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि थे, मगर वह और जम्‍मू-कश्‍मीर के उप-मुख्‍यमंत्री निर्मल सिंह नहीं पहुंचे। कश्‍मीर के भाजपा नेता और लक्षद्वीप के प्रशासक फारूक खान और जामिया के कुलपति तलत अहमद ने भी कॉन्‍फ्रेंस को संबोधित किया।

जहां एमआरएम ने कॉन्‍फ्रेंस को ”कश्‍मीर के भारत में पूर्ण एकीकरण का रास्‍ता’ और ‘कश्मीर में अलगाववादियों को हराने’ के तौर पर पेश किया, दर्शक दीर्घा में मौजूद छात्रों को आयोजकों के बारे में कुछ भी पता नहीं था। उनमें से ज्‍यादातर को लगा कि यह सरकार का कोई कार्यक्रम है जिसमें विभिन्‍न केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि मौजूद होंगे जो कश्‍मीर से बाहर रहने वाले कश्‍मीरी छात्रों को पेश आने वाली समस्‍याओं पर बात करेंगे।

सिंह ने कहा कि राज्‍य से बाहर रह रहे नौजवानों की मदद करना सरकार का कर्तव्‍य है मगर ‘कुछ मुद्दे राज्‍य सरकारों के सामने भी उठाने पड़ेंगे।’