रामदासिया समुदाय के 70 वर्षीय स्वयंभू डेरा प्रचारक हरिंदर पाल सिंह पर गांव मेहर कोटला के पांच युवाओं की हत्या का आरोप लगा है। हालांकि, इस प्रकरण में वह खुद भी मारे गए। सभी मृत लोग अनुसूचित जाति के हैं। छह मृत लोगों को आज सुबह गांव में रामदासिया मोहल्ले के एक मकान में पड़े देखा गया, जो बेचिंत सिंह उर्फ चमकौर सिंह का है। मृतकों में मकान मालिक बेचिंत सिंहकी बेटी संदीप कौर भी शामिल हैं।

अन्य मृतकों की पहचान राजपाल कौर (23), उसके चचेरे भाई एवं रामदासिया गुरुद्वारा के ग्रंथी हरपाल सिंह उर्फ सोनी (20), धर्मवीर सिंह (18) और आकाशदीप सिंह (15) के रूप में हुई।

हुआ यूं कि कल रात में ये सब मकान के एक कमरे में सुखमणि साहिब का पाठ करने के लिए बैठे थे और डेरा प्रचारक ने उनके परिजनों को उस कमरे में सुबह 4.30 बजे तक नहीं आने की ताकीद की थी और जब सुबह 6.30 बजे परिजनों की नींद खुली तो हरिंदर पाल सिंह का शव वहां बरामदे में पड़े मिला, जबकि अन्य पांच लोग कमरे में ही मृत पड़े थे और उनके पास धार्मिक पुस्तकें थीं। कमरे में सिख गुरुओं की तस्वीरें भी लगी थीं।

जिस कमरे में ये पांचों शव पड़े मिले, वहां सल्फास की गोलियों की तीन खाली शीशियां भी पड़ी मिलीं। ऐसी ही एक शीशी हरिंदर सिंह के शव के भी पास पड़ी पाई गई। पांचों लोगों के मुंह से झाग निकल रहा था जिससे लगता था कि उन्होंने सल्फास की गोलियां निगली होंगी, बाद में पांचों के गले भी तेजधार हथियार के साथ रेते गए मिले हैं, जो वहां हरिंदर सिंह के शव के पास पड़ा मिला। पांचों की हत्या तेजधार हथियार से की गई, जबकि प्रचारक के शरीर पर चोट आदि का कोई निशान नहीं मिला है, उसने सिर्फ सल्फास की गोलियां निगलकर जान दी। उसके कुर्ते और कलाई के नजदीक पर खून के धब्बे मिले हैं।

मोगा के एसएसपी जतिंदर सिंह खैहरा ने कहा, ‘इससे पता चलता है कि प्रचारक ने पहले अपने अनुयायियों को सल्फास की गोलियां खाने को दी होंगी और फिर बाद में उनके गले रेत दिए होंगे। उसने खुद भी सल्फास की गोलियां निगलीं।’ उन्होंने बताया कि हरिंदर पाल सिंह के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है, जो अब खुद मर चुका है और इस दिशा में गहन जांच जारी है।

संदीप कौर के भाई बलदीप सिंह ने बताया, ‘बाबाजी आमतौर पर हमारे घर आते-जाते थे और घर में सामने वाला कमरा उन्हें के लिए ही है। कल रात करीब 11 बजे मेरी बहन और चचेरे भाई समेत पांच लड़के-लड़कियों ने पूरी रात सुखमणि साहिब का पाठ करना था। हम सब गर्मी के कारण बाहर बरामदे में ही सो रहे थे पर बाबाजी ने हमें वहां से डांटकर अंदर कमरे में जाकर सोने को कहा।’ उन्होंने कहा, ‘जब उन्होंने कहा कि सुबह 4.30 बजे तक कमरे में कोई नहीं आएगा, तो हमें बड़ी हैरानी हुई।’ संदीप कौर के माता-पिता और दो भाईयों ने उसके निर्देश का अंधाधुंध पालन किया और सुबह सबको मृत पाया।
चमकौर सिंह का मकान गांव की संकरी गली में है और सभी पीड़ित भी इसी गली में रहते थे।

गांव के सरपंच झिरमिल सिंह ने बताया, ‘यह प्रचारक गांव में करीब 12 साल पहले आया था और करीब 1500 ग्रामीण उसके अनुयायी हैं। वह समुदाय के ही गुरुद्वारे में रहता था और वह कभी-कभार अपने अनुयायियों के घर में आता-जाता था। हमने उसके बारे में आज तक कोई गलत बात नहीं सुनी।’

इस बीच, पंजाब पुलिस को कमरे से कड़ाह प्रसाद भी पड़ा मिला, साथ में पानी के गिलास भी, इससे लगता है कि सल्फास की गोलियां उन्हें प्रसाद में मिलाकर दी गर्इं। एसएसपी ने बताया कि पुलिस इस प्रसाद को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज रही है।