सार्वजनिक परिवहन आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए मोदी सरकार ‘वन नेशन वन कार्ड’ की नीति पर विचार कर रही है। यह नीति अगर लागू हो जाती है तो एक ही कार्ड के जरिये देश के किसी भी हिस्से में लोग बस और रेल का सफर बिना परेशानी कर सकेंगे। इस नीति से जुड़ी बेहद अहम और बुनियादी बात यह है कि लोग अलग-अलग राज्यों के सार्वजनिक परिवहन के साधनों का इस्तेमाल एक ही कार्ड से कर सकेंगे। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने मीडिया को बताया कि देश में जल्द ही यह नीति लागू की जाएगी। वह सोमवार (3 सितंबर) को फ्यूचर मोबिलिटी शिखर सम्मेलन में बोल रहे थे, जिसमें ‘इंडियाज मूव टू नेक्स्टजेन ट्रांसपोर्ट सिस्टम’ यानी अगली पीढ़ी के परिवहन तंत्र की दिशा में भारत के कदम के विषय पर चर्चा हो रही थी। अमिताभ कांत ने कहा कि किसी भी देश के लिए उसका बिना रुकावट चलने वाला ट्रांसपोर्ट सिस्टम काफी अहम होता है। उन्होंने कहा कि मजबूत परिवहन क्षेत्र किसी देश के विकास की रीढ़ होता है, खासतौर से भारत जैसे घनी आबादी वाले विकासशील देश के लिए इसकी अहमियत ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि देश की परिवहन रणनीति का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के साधनों को टिकाऊ बनाना और परिवहन केंद्रित योजना और डिजिटीकरण को लागू करना है। अमिताभ कांत ने कहा कि इस नीति में लोग ही प्राथमिकता में होंगे। लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि वे गैर-प्रदूषण वाले परिवहन के माध्यमों को तरजीह दें। उन्होंने बताया कि देश की जीडीपी में बेहतर परिवहन व्यवस्था 4 फीसदी योगदान रखती है।
इस मौके पर नीति आयोग के सलाहकार अनिल श्रीवास्तव ने भी अपने विचार रखे और कहा कि सरकार पूरे भारत में मजबूत परिवन व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा, “नागरिकों को अपने वाहन का इस्तेमाल करने के बजाय वाहन इस्तेमाल मे साझेदारी यानी शेयरिंग राइड की दिशा में काम करना चाहिए। सरकार ने भारत के मॉबिलिटी विजन का संचालन करने के लिए विभिन्न विभागों के हितधारकों को एकीकृत किया है।”

