मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच चल रही हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। 19 महीने पहले शुरू हुआ यह संघर्ष अब फिर बिगड़ने लगा है। पिछले 12 दिनों में ही हिंसा में 19 लोगों की मौत हो चुकी है, और बीते एक साल में यह आंकड़ा 250 के पार पहुंच चुका है। हिंसा के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, काकचिंग, कांगपोकपी, थौबल और चुराचांदपुर जैसे सात जिलों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर प्रतिबंध आज बुधवार (20 नवंबर) तक बढ़ा दिया है। कर्फ्यू और स्कूल-कॉलेजों की बंदी भी जारी हैं।

एनपीपी के समर्थन वापस लेने से भी बीजेपी सरकार स्थिर

मणिपुर की बीजेपी सरकार में सहयोगी नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। हालांकि, बीजेपी के पास बहुमत बना हुआ है। लेकिन यह राजनीतिक घटनाक्रम राज्य की स्थिरता पर सवाल लगा रहा है। मणिपुर की आबादी लगभग 38 लाख है, जिसमें मैतेई, नगा और कुकी जैसे समुदाय प्रमुख हैं। मैतेई समुदाय हिंदू धर्म का पालन करता है और इंफाल घाटी में केंद्रित है। दूसरी ओर, कुकी और नगा समुदाय ईसाई धर्म मानते हैं और पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। संसाधनों और भूमि के बंटवारे को लेकर विवाद ने इन समुदायों के बीच तनाव बढ़ाया है।

जिरीबाम जिले में मुठभेड़ में 10 उग्रवादी मारे गए थे

11 नवंबर को जिरीबाम जिले में सुरक्षाबलों और कुकी उग्रवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में 10 उग्रवादी मारे गए। इसके बाद उग्रवादियों ने 6 मैतेई नागरिकों को अगवा कर लिया। इनमें तीन महिलाएं और तीन बच्चे शामिल थे। इनके शव बाद में नदी से बरामद हुए। इस निर्मम हत्या ने पूरे राज्य में आक्रोश और विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया।

मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इन हत्याओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दोषियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। उन्होंने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया। हिंसा को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अतिरिक्त 5,000 जवानों की तैनाती का निर्णय लिया है।

कुकी और मैतेई समुदाय के बीच भूमि अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे मुख्य विवाद का कारण हैं। इंफाल घाटी में बसे मैतेई समुदाय को आरक्षण देने की मांग भी इस हिंसा का एक अहम पहलू है, जिसका कुकी और नगा समुदाय विरोध कर रहे हैं।

हिंसा को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे। समुदायों के बीच संवाद स्थापित करना और उनकी समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना आवश्यक है। साथ ही, सुरक्षाबलों को संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी होगी ताकि आम नागरिकों का विश्वास बना रहे। मणिपुर में जारी हिंसा न केवल राज्य की शांति और स्थिरता को चुनौती दे रही है, बल्कि यह मानवता पर भी सवाल खड़ा कर रही है। सभी पक्षों को इस संकट को खत्म करने के लिए मिलकर काम करना होगा। यह समय है कि मणिपुर को हिंसा से बाहर निकालकर विकास और सौहार्द की राह पर ले जाया जाए।