Manipur Violence: मणिपुर में जारी हिंसा का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सोमवार को भी सुनवाई करेगा। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। सीजेआई ने मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (Manipur DGP) को सोमवार की सुनवाई के दौरान जवाब के साथ पेश होने का आदेश दिया था। आज डीजीपी खुद कोर्ट में पेश होंगे। इस दौरान सीजेआई की पीठ उनसे एफआईआर में देरी का कारण पूछ सकती है।
कोर्ट ने लगाई थी फटकार
पिछली सुनवाई में मणिपुर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई थी। सीजेआई ने दो कुकी-जोमी महिलाओं के साथ बलात्कार और उन्हें निर्वस्त्र करके घुमाए जाने के मामले में दो महीने तक एफआईआर न लिखे जाने पर भी सवाल उठाया था। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने पूछा कि इतनी गंभीर घटना में भी 18 दिन बाद जीरो एफआईआर और करीब एक महीने बाद एफआईआर क्यों की गई। सीजेआई ने सवाल पूछा कि आखिर इतना समय क्यों लगा।
दो महिलाओं का वीडियो हुआ था वायरल
बता दें कि 19 जुलाई को मणिपुर की दो महिलाओं का एक पुराना वीडियो सामने आया था। इसमें भीड़ ने महिलाओं को निर्वस्त्र कर उनकी परेड कराई गई। इतना ही नहीं एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार भी किया गया। यह घटना 4 मई की बताई गई। दोनों महिलाएं कुकी-जोमी समुदायर की थीं। महिलाओं ने इस मामले में पुलिस पर ही गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने ही उन्हें भीड़ को सौंप दिया था।
क्यों भड़की हिंसा ?
मणिपुर में मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने के अदालत के आदेश के विरोध में 3 मई को रैली निकाली गई थी। इसके बाद भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं सैकड़ों की संख्या में लोग घायल बताए जा रहे हैं। अब भी हजारों लोग रिलीफ कैंप में रहने को मजबूर हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं समेत बच्चे भी शामिल हैं।
