पिछले कुछ महीनों में कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदले जाने की चर्चा मीडिया में जोर-शोर से उठी। यह कहा गया कि कांग्रेस हाईकमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हटाकर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को यह कुर्सी सौंप सकता है।
ऐसी चर्चाओं के पीछे ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले का भी तर्क दिया गया लेकिन अब कांग्रेस नेतृत्व के एक ताजा कदम से ऐसा संकेत मिला है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को नहीं हटाया जाएगा।
यह कदम हाल ही में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के द्वारा चुनावी राज्य असम के लिए डीके शिवकुमार को वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त करने का है। एआईसीसी के इस कदम के बाद तमाम तरह की चर्चाएं होने लगी हैं।
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पार्टी जो भी कहेगी….
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के मामले में डीके शिवकुमार कहते हैं, ‘मेरे पास कोई विकल्प नहीं है, मेरे पास यही विकल्प है कि पार्टी जो भी कहेगी वह हमें करना होगा। कांग्रेसी होने के नाते मुझे पार्टी के लिए काम करना होगा। मैंने एआईसीसी की प्रेस रिलीज देखी है और मुझे असम में काम करने के लिए कहा गया है। मैं पहले भी असम में काम कर चुका हूं और अब मुझे फिर से वहां बुलाया जा रहा है।’
कांग्रेस के द्वारा डीके शिवकुमार को बेहद अहम माने जा रहे असम के विधानसभा चुनाव के लिए जिम्मेदारी देने से संकेत मिलता है कि पार्टी हाईकमान ने मुख्यमंत्री की कुर्सी में बदलाव के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। दूसरी ओर, पिछले कुछ वक्त में डीके शिवकुमार के समर्थकों ने कई बार उनके नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है।
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ढाई-ढाई साल वाला फॉर्मूला
कर्नाटक में बार-बार ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की बात कही जाती है। ऐसा कहा जाता है कि कांग्रेस हाईकमान ने 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद ढाई साल तक पहले सिद्धारमैया और फिर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया था हालांकि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने कभी भी इस फॉर्मूले की पुष्टि नहीं की।
सिद्धारमैया ने बनाया रिकॉर्ड
इस बीच, सिद्धारमैया ने सबसे लंबे वक्त तक कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड भी बनाया है। सिद्धारमैया कहते हैं कि वह जनता के आशीर्वाद से यहां तक पहुंचे हैं और उन्हें नहीं पता कि वह कितने समय तक सत्ता में रहेंगे।
डीके शिवकुमार ने हाल ही में कहा था कि नेताओं को अपने वचन का पालन करना चाहिए। डीके शिवकुमार के समर्थकों का कहना है कि उनके नेता के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए ही कर्नाटक में कांग्रेस को जीत मिली थी। समर्थकों का दावा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने रोटेशनल सीएम की बात कही थी और शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया था।
सिद्धारमैया को कांग्रेस हाईकमान सीएम की कुर्सी से इसलिए भी नहीं हटाएगा क्योंकि वह पिछड़े वर्गों, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं वाले समूह के प्रमुख नेता हैं और यह वर्ग कांग्रेस से मजबूती से जुड़ा है। केरल और कर्नाटक में ओबीसी वर्गों के बीच सम्मानित नारायण गुरु के स्मृति कार्यक्रम में सिद्धारमैया हाल ही में शामिल हुए थे।
