Justice Bhushan Ramkrishna Gavai: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई ने न्यायिक अधिकारियों के एक वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पद पर रहते हुए और शिष्टाचार के दायरे से बाहर जज के किसी राजनेता या नौकरशाह की तारीफ करने से पूरी न्यायपालिका में लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई जज अपने पद से इस्तीफा देकर चुनावों में भाग लेता है तो यह भी लोगों की धारणा पर असर डालता है।

जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि ज्यूडिशियल एथिक्स और ईमानदारी ऐसे बुनियादी स्तंभ हैं जो कानबनी व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखते हैं। बेंच पर और बेंच से बाहर जज का व्यवहार ज्यूडिशियल एथिक्स के हाई स्टैंडर्ड के हिसाब से ही होना चाहिए। जस्टिस बीआर गवई ने इसको समझाने के लिए एक उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के एक जज को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की आलोचना करने वाली टिप्पणियों के लिए माफी मांगनी पड़ी।

न्याय में देरी से निष्पक्ष सुनवाई करना काफी मुश्किल- जस्टिस गवई

गवई ने कहा कि न्याय के लिए लोग, भीड़ के न्याय जैसे तरीके अपना सकते हैं। इससे समाज में कानून और व्यवस्था को काफी नुकसान होता है। इतना ही नहीं लोग केस दर्ज करवाने और कोर्ट का दरवाजा खटखटाने में भी हिचकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लंबी मुकदमेबाजी और कम स्पीड से चलने वाली अदालती प्रक्रियाएं ज्यूडिशियल सिस्टम से मोहभंग पैदा करती हैं। न्याय देने में देरी से निष्पक्ष सुनवाई करना भी काफी मुश्किल हो जाता है।

अयोध्या विवाद पर बोले CJI DY चंद्रचूड़, अपने गांव में बताया जब समाधान नहीं निकल रहा था तो क्या किया

लाइव स्ट्रीमिंग की जस्टिस गवई ने की तारीफ

जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि इस देरी से बाद में निर्दोष पाए जाने वाले आरोपियों को काफी नुकसान होता है और जेलों में भीड़ काफी बढ़ जाती है। जज ने कहा कि संवैधानिक बेंच की अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और लाइव स्ट्रीमिंग से कोर्ट की पारदर्शिता में इजाफा हो रहा है। यह न्यायपालिका के लिए बेहद ही अच्छा कदम है। इससे लोगों को रियल टाइम फैसले देखने की भी इजाजत मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट की कार्यवाही की छोटी सी क्लिप जजों के बारे में गलत धारणा पैदा कर सकती है। जस्टिस गवई ने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी कुछ गाइड लाइन बनाने की जरूरत है।