ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में पिछले महीने गिरफ्तार किए गए पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन शीर्ष अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में गुरुवार (4 अक्टूबर) को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, ”आप देश के धार्मिक विश्वास को उकसा रहे हैं, यह जमानत का मामला नहीं है।” अय्यर मित्रा के वकील ने जब अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल की जान को खतरा है तो चीफ जस्टिस ने कहा, ”अगर तुम्हारे मुवक्किल को खतरा है तो जेल से सुरक्षित कोई जगह नहीं है।” पत्रकार को बीते 20 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। अय्यर मित्रा पर आरोप लगा था कि उन्होंने 13वीं सदी के कोणार्क सूर्य मंदिर की अपनी यात्रा को लेकर एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया था और कथित तौर पर भगवान जगन्नाथ और मूर्ति कलाकृतियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। ओडिशा पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने और चोट पहुंचाने के इरादे से कोणार्क सूर्य मंदिर के बारे में बेहूदा और गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी की, जो सांप्रदायिक टकराव पैदा कर सकती है।
एक निचली अदालत ने पत्रकार को जमानत देते हुए आदेश दिया था कि वह 28 सितंबर को ओडिशा पुलिस के समक्ष पेश हो। पत्रकार ने कथित तौर पर जान को खतरा बताते हुए जांच से दूरी बना ली थी। ओडिशा पुलिस अब पत्रकार को गिरफ्तार करेगी। पिछले महीने ओडिशा हाई कोर्ट के वकीलों की हड़ताल थी इसलिए आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की अस्थाई जमानत को गुरुवार तक के लिए बढ़ा दिया था। अरोपी अगर अदालत में दोषी सिद्ध हो जाता है तो उसे तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है। पत्रकार को यह आदेश भी दिया गया है कि वह अगले हफ्ते विधायकों के एक समूह के समक्ष पेश हो, जो यह देखेंगे कि उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।
ओडिशा विधानसभा में एक विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें विधायकों ने मांग की है कि अय्यर मित्रा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। विपक्ष के नेता नरसिंघा मिश्रा ने कहा, ”दो वीडियो क्लिप हैं जिनमें दिखाई दे रहा है कि एक गैर-उड़िया आदमी कोणार्क मंदिर के सामने खड़ा है और आपत्तिजनक टिप्पणी करता है। वह कहता है कि कला और मूर्तिकला हिंदू संस्कृति के विपरीत है। उसकी टिप्पणीय अनुचित और निंदनीय हैं।” मिश्रा ने आगे कहा कि आरोपी के खिलाफ कानूनी मुकदमा चलाने के लिए उसकी टिप्पणी ही पर्याप्त सबूत है।
