रक्षा मंत्रालय ने सेना में पहले चरण के सुधारों को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना मुख्यालय के पुनर्गठन प्रस्तावों को बुधवार को मंजूरी दे दी। इसके तहत सेना मुख्यालय से 206 अधिकारियों को फील्ड में भेजने, एक अलग सतर्कता प्रकोष्ठ बनाने और मानवाधिकार मुद्दों पर अलग विभाग बनाने के फैसले को मंजूरी दी गई है। सेना ने 12 स्वतंत्र अध्ययनों के आधार पर 13 लाख सैन्य बल में कटौती करने और इसकी युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए सुधार के खाके को पिछले साल अक्तूबर में अंतिम रूप दिया था।

रक्षा मंत्री के ताजा फैसले के बारे में रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘रक्षा मंत्री ने सेना मुख्यालय के पुनर्गठन संबंधी कई फैसलों को मंजूरी दी है।’ मंत्रालय ने कहा कि 206 सैन्य अधिकारियों को सेना मुख्यालय से दूसरी जगहों पर भेजा जा रहा है और वे विभिन्न सैन्य संरचना व सैन्य टुकड़ी को कमान करने के लिए उपलब्ध होंगे। जिन अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाएगा, उनमें तीन मेजर जनरल, आठ ब्रिगेडियर, नौ कर्नल और 186 लेफ्टिनेंट कर्नल/मेजर हैं।

सेना प्रमुख के तहत अलग सतर्कता प्रकोष्ठ गठित किए जाने की भी राजनाथ सिंह ने मंजूरी प्रदान कर दी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ‘सेना प्रमुख (सीओएएस) के तहत एक स्वतंत्र सतर्कता प्रकोष्ठ काम करेगा। इसके तहत अतिरिक्त महानिदेशक (सतर्कता) को सीधे सीओएएस के अंतर्गत रखा जाएगा।’ सतर्कता प्रकोष्ठ में कर्नल स्तर के तीन अधिकारी होंगे, जिसमें थल सेना, वायु सेना और नौसेना से एक-एक अधिकारी होंगे।

भ्रष्टाचार और अनुचित व्यवहार की शिकायतों को देखने के लिए सीधे थलसेना अध्यक्ष के तहत सतर्कता प्रकोष्ठ काम करेगा। इसकी अगुआई के लिए मेजर जनरल रैंक के अधिकारी को अतिरिक्त महानिदेशक (सतर्कता) बनाया जाएगा। इस प्रकोष्ठ में कर्नल रैंक के समकक्ष सेना के तीनों अंगों से एक-एक अधिकारी को भी रखा जाएगा। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अभी जो व्यवस्था काम कर रही है उसमें सेना प्रमुख के लिए विजिलेंस का काम कई एजंसियों के माध्यम से होता है। इसके लिए कोई अकेली विंडो (सिंगल इंटरफेस) मौजूद नहीं है।

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मानवाधिकार के लिए विशेष अनुभाग उप थलसेना प्रमुख (वीसीओएएस) के तहत काम करेगा। मानवाधिकार समझौतों व इससे जुड़े मूल्यों को शीर्ष प्राथमिकता देने के लिए इसकी स्थापना की जा रही। मानवाधिकार प्रकोष्ठ या सेक्शन सेना के उप प्रमुख के मातहत होगा और इस की अगुआई मेजर जनरल रैंक के अधिकारी करेंगे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ‘यह मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों को देखने के लिए नोडल बॉडी के तौर पर काम करेगा। साथ ही जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी। एसपी/एसएसपी रैंक का पुलिस अधिकारी भी इस सेल का हिस्सा होगा, जो प्रतिनियुक्ति पर लाया जाएगा।’