भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 15 जुलाई को तड़के 2.51 बजे अपने महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 लॉन्च करने जा रहा है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसे लॉन्च किया जाएगा। लॉन्चिंग की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत वाले इस मिशन को जीएसएलवी एमके-III रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा।
इसरो ने आठ जुलाई को चंद्रयान-2 की तस्वीरें अपनी बेवसाइट पर साझा की थीं। इस मिशन के तहत चंद्रयान-2 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजने की योजना है। योजना के मुताबिक अगर चंद्रयान-2 चांद पर बर्फ की खोज कर पाता है तो भविष्य में वहां इंसानों का प्रवास संभव हो सकता है। 15 जुलाई को प्रक्षेपित होने के करीब 53-54 दिन बाद उसकी लैंडिंग चांद के दक्षिणी ध्रुव पर होगी। लैंडिंग के बाद करीब दो हफ्ते तक चंद्रयान-2 चांद का डेटा इकट्ठा करेगा।
चांद पर लैंड करने के बाद भारत दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। अब तक कोई भी देश चांद के दक्षिणी ध्रुव पर नहीं जा सका है। ऐसा करते ही भारत दुनियाभर में एक नया रिकॉर्ड बनाएगा। दक्षिणी ध्रुव पर सूज की रोशनी तिरछे पड़ती है, इसलिए यह इलाका अंधेरे में रहता है। इस मिशन की सफलता से भारत के गगनयान मिशन को मदद मिलेगी, जिसके तहत 2021-22 तक भारत इंसान को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बना रहा है।
चंद्रयान-2 के विशेष रोवर ‘प्रज्ञान’ के लिए IIT कानपुर में तकनीक तैयार की गई हैं। इसमें सबसे अहम है मोशन प्लानिंग। मतलब चांद की सतह पर रोवर कैसे, कब और कहां जाएगा? दस साल के अंदर भारत दूसरा चंद्रयान भेजने जा रहा है। इससे पहले साल 2009 में चंद्रयान-1 भेजा गया था। हालांकि, उसमें रोवर शामिल नहीं था। चंद्रयान-1 में केवल एक ऑर्बिटर और इंपैक्टर था जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा था। बता दें कि दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 16 साल पहले ही 2003 में चंद्रयान की सफलता की कामना की थी और भारतीय वैज्ञानिकों को इसके लिए प्रोत्साहित किया था।
