भारत सरकार के औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को रेलवे ने बंद गले के काले कोट पर विराम लगा दिया। रेलवे ने एलान किया कि अब बंद गले का काला कोट भारतीय रेलवे के अधिकारियों की पोशाक का हिस्सा नहीं रहेगा। यह पोशाक अंग्रेजों के समय से इस्तेमाल हो रही है। रेलवे ने इसमें बदलाव करते हुए स्वदेशी वस्त्र को अपनाने का फैसला किया है। रेल मंत्रालय रेलवे के प्रभाग सहित अन्य जगहों के ब्रिटिश शासन के दौरान रखे गए अंग्रेजी नाम को भी भारतीय नाम दिया जाएगा।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित पुरस्कार समारोह में रेलवे के नए फैसले व विचार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वाल्टेयर रेलवे प्रभाग का नाम विशाखापत्तनम रेलवे प्रभाग होना चाहिए। बता दें कि वाल्टेयर एक फ्रान्सीसी लेखक थे, इन्हें यूरोपीय बौद्धिक आंदोलन में प्रमुख व्यक्ति माना जाता है। यह आंदोलन ज्ञानोदय के नाम से भी जाना जाता है। रेलवे अपने कर्मचारियों के कौशल को बेहतर बनाने के लिए सेना की तरह पदोन्नति देगा। पहले कर्मचारी से वह काम करवाकर देखा जाएगा कि जिसके लिए उसे चुना गया है। उसके बाद उनके कौशल विकास पर ध्यान दिया जाएगा।

नवाचार के लिए अगले साल 12 नए पुरस्कार भी दिए जाएंगे

रेलवे 2047 तक विकसित देश के लिए विकसित रेल तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है, जिसके लिए नया पैमाना बनाया जाएगा। रेलवे में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक मदद भी दी जाएगी। नवाचार के लिए अगले साल 12 नए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। पोर्टल भी जारी किया जाएगा। इसमें भाग लेने वाले सबसे अच्छे नवाचार को करोड़ों रुपए की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। यदि उसकी परियोजना बेहतर हुई तो चार साल तक काम करने का मौका भी मिलेगा।

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दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित हुए 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार 2025 में करीब 100 रेलवे कर्मचारी व अधिकारियों को पुरस्कार प्रदान किया गया। इसमें सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र को 26 शील्ड दिए गए। इस बार एक ऐसे क्षेत्र को पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं किया गया जिसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा। अगली बार ऐसे तीन क्षेत्र को पुरस्कार श्रेणी से बाहर रखा जाएगा। रेलवे में होगी एक लाख 20 हजार भर्ती रेलवे में जल्द ही एक लाख 20 हजार भर्तियां होंगी। इनके लिए होने वाली परीक्षा को आधुनिक बनाया जाएगा। रेलवे की कोशिश रहेगी कि कोई भी पेपर लीक न हो। मौजूदा समय में करीब आधे कर्मचारी पिछले दस साल में भर्ती हुए हैं।

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तकनीक निर्यात कर रहा रेलवे एक समय था जब रेलवे यूरोप सहित दूसरे विकसित देशों से तकनीक व दूसरे सामान आयात करता था। आज उन्हीं तकनीक व सामान को देश में बनाकर रेलवे विकसित देशों को निर्यात कर रहा है। इससे कर्मचारियों का विश्वास काफी बढ़ा है। मौजूदा समय में मेट्रो के डिब्बे सहित दूसरे उपकरण दुनिया के दूसरे देशों में भेजे जा रहे हैं।

549 ट्रेनों की बढ़ी गति भारतीय रेलवे ने इस साल समय सारणी में 549 ट्रेनों की गति बढ़ाई है। इससे यात्रा का समय कम हुआ और ट्रेन समय पर अपने स्थान पर पहुंच पा रही है। रेलवे ने साल 2025 में 122 नई ट्रेनें शुरू की है। इससे आम आदमी को तेज यात्रा और बेहतर समय की पाबंदी की सुविधा मिली है।