नौसेना ने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस को अपने विमानवाहक पोतों पर तैनात करने की संभावना को खारिज करते हुए कहा है कि यह ‘जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पा रहा है। ‘अधिक वजन होने’ को तेजस की तैनाती नहीं करने की एक वजह करार देते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि नौसेना एक वैकल्पिक विमान को लेकर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, ‘जहां तक विमानवाहक पोत आधारित विमान की बात है तो हमें विमानवाहक पोत को शामिल करने के लिए समय चाहिए। हमारे पास मिग 29के है जो विक्रमादित्य से परिचालित होता है और आईएसी विक्रांत से परिचालित होगा। लांबा ने कहा, ‘हम अपने दो विमानवाहक पोतों से हल्के लड़ाकू विमान (तेजस) के परिचालित होने की उम्मीद करते हैं। लांबा ने कहा, ‘हम अपने दो विमानवाहक पोतों से हल्के लड़ाकू विमान (तेजस) के परिचालित होने की उम्मीद करते हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल नौसेना ऐसे विमान की पहचान करने की प्रक्रिया में है जो जरूरतों के हिसाब से खरा उतरता हो।

उसी साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान तेजस को वायुसेना में शामिल किए जाने को लेकर ‘अद्वितीय गर्व और खुशी’ का मामला और ऐसा कदम बताया था, जो भारतीय वैज्ञानिकों के कौशल और क्षमता को दर्शाता है। बता दें कि तेजस के पहले स्क्वाड्रन  बेंगलुरू में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया जिसके दो लड़ाकू विमान आज वायुसेना में शामिल हुए। यह देश के सैन्य विमानन क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि थी। लेकिन अब इसके वजन की वजह से  विमानवाहक पोतों में शामिल नहीं पो रहा है।

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15 साल पहले पहली उड़ान भरने वाला स्‍वदेशी लड़ाकू विमान तेजस बेंगलुरु में कार्यक्रम के बाद भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिया गया। तेजस के निर्माण और एयरफॉर्स में शामिल होने में कई साल लगे। हालांकि तेजस का वायुसेना में शामिल होना बड़ा कदम है। यह पुराने हो चुके मिग-21 की जगह लेगा। तेजस अपनी तरह का सबसे हल्‍का सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है। इससे हवा से जमीन, हवा से हवा और एंटी शिप मिसाइल लगाई जा सकेंगी। वायुसेना का कहना है कि 2017 से इसे अग्रिम चौकियों पर तैनात किया जाएगा।