भारतीय सेना ने ब्रिटेन में 6 कर्मचारियों के दम पर चलनी वाली ब्रिटिश बैंड इंस्ट्रूमेट कंपनी को 31 करोड़ रुपए का ठेका दिया है। सेना में इस्तेमाल होने वाले बैंड और अन्य सामान के लिए यह ठेका दिया गया है। लंदन की यह कंपनी 1,500 म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट भारत भेजेगी। कंपनी के साथ सेना ने दो करार किए हैं। एक करार के तहत कंपनी बैगपाइपर बैंड 26 इंडियन मिलिट्री बैंड को भेजेगी और दूसरे के समझौते के तहत ड्रम्स कॉर्नेट्स, ट्रोमबोन्स, ट्यूबस, फ्लूट्स, क्लैरीनेट्स, फ्रेंच हॉर्न और यूफोनियम 47 रेजीमेंट सेंटर पर भेजे जाएंगे।
कंपनी 10 साल पुरानी है। कंपनी के संस्थापक अलन ह्यूज्स ने कहा, यह अब तक का हमें मिले सबसे बड़े करार में है। उन्होंने कहा, भारतीय सेना में इस्तेमाल होने वाले बैंड ब्रिटिश मिलिट्री बैंड जैसे ही हैं। यह यंत्र लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। भारत में यह इंस्ट्रूमेंट नहीं बनाए जाते हैं। ह्यूज्स इन इंस्ट्रूमेंट का निर्माण बूसे एंड हॉकेस नाम की कंपनी के तहत करते हैं। यह कंपनी 70 देश में अपने बनाए यंत्रों को भेजती है। इनके ज्यादातक इंट्रूमेंट कॉमनवेल्थ गेम में इस्तेमाल होते हैं।
अलन ह्यूज्स ने बताया कि, लोगों को लगता है कि बैगपाइप्स स्कॉटिश हैं लेकिन असल में यह मिडिल ईस्ट और भारतीय सबकॉन्टिनेंटल से हैं। ह्यूज्स दशकों से इन इंस्ट्रूमेंट का निर्माण और रिपेयर करते आ रहे हैं। 1950 के दौर की बात याद करते हुए वह बताते हैं कि उनके एक साथी ने इन मिलिट्री बैंड को महाराजाओं के पास सप्लाई कर दिया। जिसका भुगतान उनकी तरफ से सोने के ईंट से किया गया था। इसे दुबई कंवर्ट करने के लिए भेजा गया। जिसके बाद इसे वापस दुबई से ब्रिटेन भेजा गया।
इंटरनेशनल ट्रेड डिपार्टमेंट के स्पोक्सपर्सन ने कहा, ब्रिटेन से हर साल 7.9 बिलियन यूरो का सामान भारत भेजा जाता है। भारतीय सेना की तरफ से मिले इसे कांट्रैक्ट से जाहिर है कि हमारे प्रोडक्ट को खासा पसंद किया जा रहा है। जिससे मांग बढ़ रही है।

