दुनिया के सबसे खतरनाक लड़ाकू हेलिकॉप्टर बताए जा रहे अपाचे को भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। वायुसेना को मिलने वाले इन हेलिकॉप्टरों की पहली खेप अमेरिका से 27 जुलाई को गाजियाबाद के हिंडन एअरबेस पर पहुंचेगी। पहली खेप में चार हेलिकॉप्टर होंगे। इन हेलिकॉप्टरों को औपचारिक तौर पर अगस्त के आखिरी हफ्ते में वायुसेना में शामिल किया जाएगा। इन्हें पठानकोट में तैनात किया जाएगा। दो सीटों वाले अपाचे हेलिकॉप्टर में स्ट्रिंगर मिसाइलें, 30 मिलीमीटर की दो मशीनगन और टैंकरोधी हेलफायर मिसाइल प्रणाली लगी होती हैं।
भारत ने अमेरिका से 22 अपाचे हेलिकॉप्टरों की खरीद की है। वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, अपाचे हेलिकॉप्टरों को अमेरिकी वायुसेना के एएन 224 मालवाही विमानों के जरिए वायुसेना के हिंडन एअरबेस पर लाया जाएगा। अपाचे हेलिकॉप्टरों की पहली स्क्वायड्रन पठानकोट में तैनात की जाएगी, जिसके कमांडर ग्रुप कैप्टर एम शायलू होंगे। वह इससे पहले कार निकोबार में एमआई 17 वी5 हेलिकॉप्टर यूनिट के सीओ थे।
पठानकोट में वायुसेना की 125 हेलिकॉप्टर स्क्वायड्रन (125 एच स्क्वा) तैनात है, जो अभी एमआइ-35 लड़ाकू हेलिकॉप्टर उड़ाती है। अब यह देश की पहली अपाचे स्क्वायड्रन होगी। दूसरी स्क्वायड्रन को असम के जोरहाट में तैनात किए जाने की योजना है। 2020 तक सभी 22 अपाचे भारतीय वायुसेना को मिल जाएंगे। यह हेलिकॉप्टर तीन दशक पुराने एमआइ-35 युद्धक हेलिकॉप्टरों की जगह लेगा। अपाचे एएच 64 ए हेलिकॉप्टर 30 मिमी की मशीनगनों से लैस है, जिसमें एक बार में 1200 गोलियां दागी जा सकती हैं।
इसके अलावा इसमें टैंक रोधी हेलफायर मिसाइलें लगी हैं। अतिरिक्त हथियार के तौर पर हाइड्रा अनगाइडेड रॉकेट लगा होता है, जो जमीन के किसी निशाने पर अचूक वार करता है। अपाचे 150 नॉटिकल मील की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। भारतीय वायुसेना अभी तक रूस में बने एमआइ 35 और एमआइ 25 लड़ाकू हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही है। इन हेलिकॉप्टरों की एक स्क्वायड्रन पठानकोट और दूसरी राजस्थान के सूरतगढ़ में तैनात है। अपाचे को पठानकोट में तैनात किया जाएगा।

