प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से तीनों सेनाओं के प्रमुख चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पद बनाने का ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में सैन्य व्यवस्था, सैन्य शक्ति और संसाधन पर लंबे वक्त से सुधार को लेक चर्चा चल रही है। कई कमीशनों की रिपोर्ट में तीनों सेनाओं के लिए एक प्रमुख होने की बात कही गई। उन्होंने कहा, “हमारी पूरी सैन्य शक्ति को एक मुस्त होकर एक साथ काम करना होगा। इसके लिए हम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी CDS की व्यवस्था करेंगे। इस पद के गठन के बाद तीनों सेनाओं के शीर्ष पर प्रभावी नेतृत्व मिलेगा।”

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस की नियुक्ति की मांग कारगिल युद्ध के बाद से ही शुरू हुआ। सुब्रमण्यम के नेतृत्व में ‘कारगिल रिव्यू कमेटी’ ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाने की सिफारिश की थी। जिसमें मसौदा रखा गया कि सरकार और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संवाद और तालमेल कायम रखने के लिए एक सेनापति की जरूरत है। ऐसे में इस काम के लिए सीडीएस की नियुक्ति जरूरी है।

सीडीएस को लेकर देश में 1998 से लगातार बहस चल रही है। इसकी शक्ति और तीनों सेनाओं के सेनाध्यक्षों की कार्यशैली के बीच सामंजस्य और चुनौतियों को लेकर विशेषज्ञों के बीच कई राय हैं। लेकिन, इकोनॉमिक्स टाइम्स को दिए इंटरव्यू में सेना के दिग्गज सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा था कि राजनीतिक संस्था के लिए सैन्य सलाह-मशवरा एनएसए द्वारा पूरा नहीं की जा सकती है। भारत में NSA पर सिर्फ भारतीय विदेश सेवा या भारतीय पुलिस सेवा के लोगों का कब्जा है। उन्होंने बताया कहा, “सीडीएस भारत में सैन्य प्रतिष्ठान की जरूरत बनी हुई है। बाहरी सुरक्षा मामलों पर राजनीतिक प्रतिष्ठान को सलाह देने के लिए एनएसए के पास सैन्य अनुभव या विशेषज्ञता नहीं है। रक्षा सचिव से अपेक्षा करना उचित नहीं है।”

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