देश में इस साल मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में एलपीजी की रिकॉर्ड खपत दर्ज की गई। एलपीजी की खपत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी सरकार की तरफ से खाना बनाने में क्लीन फ्यूल उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच हुई है। सरकार की तरफ से ग्रामीण व दूरदराज इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर का भी इसमें योगदान है। हालांकि, भारत की दो -तिहाई आबादी अभी भी गांवों में रहती है और खाने के लिए पारंपरिक ईंधनों लकड़ी, कोयला आदि का प्रयोग करती है।

वित्त वर्ष 2018-19 में भारत में 24.9 मिलियन टन एलपीजी की खपत दर्ज की गई। यह पांच साल पहले की तुलना में 53 फीसदी अधिक है। साल 2017-18 के मुकाबले यह 6.9 फीसदी अधिक है। एनर्जी कंसल्टंसी एफजीई में एशिया ऑयल के निदेशक श्री परावाइक्कारासु ने बिजनेस स्टैंडर्ड को भेजे ई-मेल में कहा, एलपीजी की खपत में सबसे अधिक योगदान सामाजिक कल्याण कार्यक्रम उज्ज्वला योजना के कारण हुआ है।

सरकार ने साल 2016 में इस योजना को शुरू किया था। इस योजना के तहत अब तक देश के 714 जिलों में 7.2 करोड़ नए रसोई गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। सरकार की नीतियों मुख्य रूप से उज्ज्वला योजन और मिडिल क्लास के बढ़ने के कारण एलपीजी का बहुत अधिक प्रसार हुआ है। साल 2016 के अंत तक उज्ज्वला योजना के कारण 80 फीसदी भारतीय परिवारों के पास एलपीजी कनेक्शन था।

13.2 मिलियन टन गैस का आयातः भारत ने मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में 13.2 मिलियन टन एलपीजी का आयात किया। यह वित्त वर्ष 2013-14 के आयात के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। वित्त वर्ष 2018-19 में आयात की मात्रा पिछले साल की तुलना में 15.9 फीसदी अधिक है। वुड मैकेंजी में रिसर्च एनालिस्ट अमन वर्मा का कहते हैं, ‘एलपीजी के प्रयोग में अभूतपूर्व वृद्धि भारत की स्वनिर्भरता को साल 2013 के 70 फीसदी के मुकाबले घटाकर 42 फीसदी तक कर देगी। ‘

केरोसीन की बिक्री में कमीः  एलपीजी के प्रयोग से देश में केरोसीन की खपत कम हुई है। देश में केरोसीन की बिक्री में 2018-19 में 10 फीसदी की कमी हुई। इसकी बिक्री साल 2013-14 के 7.2 मिलियन टन के मुकाबले मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष में 3.5 मिलियन टन रही।