आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण यानी इनकम टैक्स एपीलिएट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने अपने ताजा फैसले में कहा है कि एनडीटीवी के को फाउंडर प्रणय रॉय 642 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी में शामिल हैं। मुंबई में आयकर अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 2009 में कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय और एनडीटीवी के प्रमोटर प्रणय रॉय ने जान बूझकर कुछ सूचनाएं छुपाईं और 642 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की। ये सूचनाएं एनडीटीवी ग्रुप से जुड़ी शेल कंपनियों के बारे में थी। अंग्रेजी वेबसाइट डीएनए इंडिया डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक ITAT ने अपने फैसले में कहा कि प्रणय रॉय 642 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए व्यक्तिगत रुप से जिम्मेदार हैं। आयकर अदालत के आदेश में लिखा गया है कि एनडीटीवी और इनके प्रमोटर्स ने 2007-08 से लेकर 2009-10 तक 1100 करोड़ रुपये के काले धन को वैध बनाया इसमें से 642.54 करोड़ रुपये के काले धन की पुष्टि ITAT द्वारा हो चुकी है।
ITAT यानी कि आयकर अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘ ITAT ने आयकर विभाग की इस जांच को सही पाया है कि प्रणय रॉय ने एनडीटीवी की विदेशी सब्सिडरी कंपनियों के अंकेक्षित लाभ हानि खाते, बैलेंस शीट, और वार्षिक रिपोर्ट को एनडीटीवी की वार्षिक रिपोर्ट के साथ नत्थी नहीं कर इन विदेशी कंपनियों की वित्तीय लेन देन को जान बूझकर छुपाने की कोशिश की।’ अधिकरण ने ये भी कहा कि इन तथ्यों के सामने आ जाने के बाद दूसरी पर्यवेक्षक और नियामक एजेंसियों को सावधान हो जाने की जरूरत है। आयकर अदालत ने कहा, ‘हमें ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि करदाता का आचरण दिखाता है कि उन्हें अपनी सब्सिडरी कंपनियों के वित्तीय लेन देन , उसके स्टेकहोल्डर और सरकारी एजेंसियों जिसमें की आयकर विभाग भी शामिल है, को दिखाने की कोई मंशा नहीं थी।’
बता दें कि इससे पहले 5 जून को भी सीबीआई ने वित्तीय लेन देन के एक मामले में एनडीटीवी के दफ़्तर और प्रणय रॉय के घर पर छापा मारा था। तब एनडीटीवी ने सीबीआई के इस कदम को प्रेस की आजादी पर हमला बताया था। इस मुद्दे पर सरकार ने भी सफाई दी थी और कहा था कि उनकी सीबीआई के छापे में कोई रोल नहीं है।

