सिर्फ सात साल में पूरा देश डेंगू की चपेट में आ गया। वर्ष 2008 तक मुल्क के 18 सूबे और केंद्र शासित प्रदेश ही डेंगू की जद में थे, लेकिन 2015 में यह जानलेवा बीमारी 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैल गई। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी) के 2015 के मसौदे से यह बात उजागर हुई है। पिछले साल डेंगू से देशभर में 220 मौतें हुईं जबकि 99,913 लोग इस रोग से पीड़ित हुए। मसौदे के मुताबिक 2006 से 2008 के बीच देश के 18 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ही डेंगू मामलों की रिपार्ट करते थे। 2009 में 20 और 2010 में 29 राज्यों ने इस बीमारी के बारे में सूचना दी। इसके पांच साल बाद ही प्रदेशों की संख्या 35 पर पहुंच गई। मसौदे के अनुसार देश में तेजी से डेंगू बुखार फैलने की वजह तीव्र विकास और आर्थिक विस्तार है जिससे न सिर्फ शहरीकरण बढ़ा बल्कि शहरों और सूबों के बीच लोगों का आना-जाना भी बढ़ गया। 1991 के बाद से डेंगू ने पैर पसारने शुरू किए थे लेकिन 1996-97 में इस बीमारी से देश पहली बार खौफजदा हुआ था।

असम-अरुणाचल तक डेंगूएनवीबीडीसीपी का कहना है कि न सिर्फ डेंगू के केस बढ़े बल्कि यह रोग नए इलाकों में फैल गया। आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पडुचेरी, पंजाब, तमिलनाडु,पश्चिम बंगाल में लगातार डेंगू का प्रकोप रहता है। इस बीच, असम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से भी डेंगू की रिपोर्ट दर्ज होने लगी। इतना ही नहीं, देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बाकी पेज 8 पर