जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के बाद राज्य में जारी पाबंदियों के खिलाफ सिविल सेवा से इस्तीफा देने वाले IAS अधिकारी कानन गोपीनाथ का कहना है कि अब उनका सेवा में लौटने का कोई इरादा नहीं है। दरअसल सरकार की तरफ से कानन को ड्यूटी ज्वाइन करने संबंधी नोटिस भेजा गया है, लेकिन आईएएस अधिकारी ने ड्यूटी पर वापस लौटने की संभावनाओं को खारिज कर दिया है।
साल 2012 बैच के AGMUT कैडर के आईएएस अधिकारी का कहना है कि ‘मेरा सेवा में वापस आने का कोई इरादा नहीं है, यह बात खत्म हो चुकी है और ना ही मैं ड्यूटी जारी रखना चाहता हूं। यह सिर्फ सर्विस रुल कंडीशन को ही प्रभावित करेगा और इसे गैर-मान्यता प्राप्त अवकाश माना जाएगा। द न्यूज माइन्यूट की एक खबर के अनुसार, कानन गोपीनाथन ने बताया है कि ‘सरकार का यह नोटिस सिर्फ एक प्रक्रिया है। इस्तीफा ना स्वीकार किया गया है और ना ही खारिज किया गया है। सरकार इस तरह 3-5 साल तक भी इस्तीफा लंबित रख सकती है।’
दादर और नगर हवेली और दमन दीव में ऊर्जा, शहरी विकास और कृषि सचिव के पद पर तैनात गोपीनाथन के अनुसार, ‘यह सही नहीं है। यदि हम कोर्ट में जाएं तो वहां ऐसे कई प्रावधान जो यह सिद्ध कर सकते हैं कि एक अधिकारी को इस्तीफा देने का अधिकार है।’ बता दें कि कानन गोपीनाथन ने जम्मू कश्मीर में पिछले कई दिनों से जारी लॉकडाउन के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। दरअसल जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधान हटाए जाने के बाद से वहां इंटरनेट, फोन, स्कूल कॉलेज, बाजार आदि बंद हैं।
कानन गोपीनाथन के अनुसार, “मैं अपनी विचारों की अभिव्यक्ति वापस पाना चाहता हूं। मैंने सिविल सेवा इस विश्वास के साथ ज्वाइन की थी कि मैं दूसरों को आवाज दे सकूंगा, लेकिन यहां मैं अपनी खुद की आवाज नहीं उठा पा रहा हूं। मेरा इस्तीफा मुझे मेरी विचारों की अभिव्यक्ति वापस देगा।” इससे पहले अपने एक बयान में गोपीनाथन ने कहा था कि ‘सिविल सेवा से इस्तीफा देना उनके लिए काफी भावुक कर देने वाला फैसला था, लेकिन मैं सिर्फ अपनी चेतना के हिसाब से कदम उठाना चाहता हूं।’
आईएएस अधिकारी ने कहा कि ‘लोगों के मूलभूत अधिकारों को दबाया जा रहा है और इसके बावजूद लोग चुप हैं, कहीं कोई विरोध नहीं हो रहा है। इस बात ने मुझे इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। मीडिया भी सच को सामने लाने का इच्छुक नहीं है।’ बता दें कि कानन गोपीनाथन इससे पहले साल 2018 में उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने दादर और नागर हवेली में जिलाधिकारी रहते हुए बाढ़ पीड़ितों के लिए बेहतरीन काम किया था।
