आयकर विभाग ने अब ऐसे भारतीयों के खिलाफ बड़ा जांच अभियान शुरू किया जिन्होंने अवैध तरीके से विदेशों में धन और संपत्ति छिपाई है। ऐसे मामलों में लिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई के लिए आयकर विभाग नए कालाधन निरोधक कानून का उपयोग कर सकता है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने सोमवार (21 अक्टूबर) को समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ”विभाग विदेशी समकक्षों के सहयोग से विदेशी सरजमीं में हजारों भारतीय के द्वारा जमा कराए गए धन और संपत्तियों की खरीद की जांच कर रहा है।” केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने इस कदम की पुष्टि की लेकिन इस बारे में कुछ भी बताने से मना कर दिया। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि आयकर अधिकारी वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) और अन्य स्रोतों से विदेशों में हुए लेन-देन के अहम ब्योरों के साथ ऐसे मामलों पर काम कर रहे हैं और यह कालाधन के खिलाफ एक बड़े सम्मिलित प्रयास का हिस्सा है। कई मामलों में लोगों को नोटिस जारी कर सौदों के बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।

अधिकारियों के अनुसार ऐसे कई मामलों में नामी और र्चिचत लोग हैं। कई उच्च नेटवर्थ वाले लोग जांच के घेरे में हैं। हालांकि, नये कालाधन निरोधक कानून के तहत केवल उन्हीं मामलों में आपराधिक कार्रवाई होगी जो आयकर रिटर्न में कर अधिकारियों के समक्ष नहीं आया या कर चोरी के इरादे से किये गये। बता दें कि सरकार ने वर्ष 2015 में कालाधन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) एवं आयकर अधिरोपण अधिनियम नाम से नया कानून लाई थी।

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नया कानून विदेशों में खरीदी गयी अवैध संपत्ति से जुड़े मामलों से संबद्ध है। इस नये कानून के तहत अघोषित विदेशी संपत्ति और आय पर 120 फीसदी कर और जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा इसमें 10 साल तक की जेल का भी प्रावधान है। बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार कालाधन के लेकर कई कदम उठा चुकी है, जिसमें 2016 में हुई नोटबंदी भी शामिल थी। सरकार कई दफा इस बात के संकेत दे चुकी है कि कर चोरी करने वाले और कालाधन रखने वाले किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे।