Maharashtra Politics: “आपके पास वोट हैं और मेरे पास धन है” टिप्पणी पर उठे विवाद के बीच उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि यह “धमकी नहीं” थी।
शुक्रवार को बारामती तहसील में मालेगांव नगर पंचायत के चुनाव के लिए प्रचार करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख ने कहा कि उन्होंने जो धनराशि देने का वादा किया था, वह तभी जारी करेंगे जब उनकी पार्टी के सभी उम्मीदवार निर्वाचित होंगे।
अजित पवार, जिनके पास वित्त विभाग भी है। उन्होंने कहा, “केंद्र और राज्य के पास कई योजनाएं हैं। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने इन पर मिलकर काम किया है। अगर हम सब मिलकर काम करें और इन योजनाओं को सही तरीके से लागू करें, तो हम मालेगांव का विकास सुनिश्चित कर सकते हैं।”
विपक्ष की आलोचना का सामना करते हुए अजित पवार ने कहा, “अगर आप सभी 18 एनसीपी उम्मीदवारों को चुनते हैं, तो मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि धन की कोई कमी न हो। अगर आप उन सभी को चुनते हैं, तो मैंने जो भी वादा किया है, उसे पूरा करूंगा। लेकिन अगर आप मेरे उम्मीदवारों को ‘काटेंगे’, तो मैं भी (धन) “काटूंगा”। आपके पास वोट देने का अधिकार है, और मेरे पास धन जारी करने का अधिकार है। अब तय करें कि आप क्या करना चाहते हैं।”
हालांकि, रविवार को उन्होंने नरम रुख अपनाते हुए कहा कि वह “क्षेत्र में विकास” चाहते हैं। अजित पवार, जिनकी पार्टी एनसीपी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “मैंने वही कहा जो मुझे कहना था। अब यह विपक्ष पर निर्भर है कि वे क्या कहना चाहते हैं। यह उनका संवैधानिक अधिकार है। मैं सच कहता हूं। मैं आलोचना को महत्व नहीं देता। मैं काम को महत्व देता हूं। हम विकास चाहते हैं, और हम उस क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करना चाहते हैं। हम केंद्र और राज्य से मिलने वाले धन का उपयोग क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए करना चाहते हैं। हम सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं। विकास हमारा एजेंडा है। “
यह पूछे जाने पर कि क्या उनका बयान “धमकी” है, उन्होंने जवाब दिया, “यह धमकी कैसे है? आप तो अन्य जगहों पर भी चुनाव देख रहे हैं। चुनाव से पहले हर कोई वादे करता है।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने भी कहा था कि अगर वे (हाल ही में संपन्न) बिहार विधानसभा चुनाव जीतते हैं तो वे हर घर में एक सरकारी नौकरी देंगे।
अजित पवार ने कहा, “हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है। इसे कितना सुनना है और कितना नहीं, यह जनता को तय करना है।”
देवेंद्र फडणवीस ने भी टिप्पणी को कमतर आंकने की कोशिश करते हुए कहा, “ऐसी बातें चुनाव के दौरान कही जाती हैं।” उन्होंने कहा, “इसका कोई मतलब नहीं है। मैं बस इतना कहूंगा कि चुनाव के बाद हम सभी शहरों का विकास करेंगे। मैं भी किसी जगह जाकर कहूंगा, ‘मुझे चुनिए, मैं आपको ज़्यादा पैसा दूंगा।’ आपको ऐसी बातें कहनी ही होंगी।” उन्होंने कहा, ‘‘हम पूरे महाराष्ट्र का विकास चाहते हैं।’’
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वहीं, विपक्ष ने अजित पवार की टिप्पणी की आलोचना की और आश्चर्य जताया कि चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे ने संवाददाताओं से कहा, “धन आम लोगों द्वारा दिए गए करों से दिया जाता है, अजित पवार के घर से नहीं। अगर पवार जैसे नेता मतदाताओं को धमका रहे हैं, तो चुनाव आयोग क्या कर रहा है?”
एनसीपी (शरद पवार) प्रवक्ता महेश तपासे ने भी अजित पवार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह धनराशि राज्य के लोगों की है। कांग्रेस के विजय वेड्डीतिवार ने कहा कि अजित पवार इसलिए धमकी देते हैं क्योंकि वह सत्ता में हैं। उन्होंने कहा, “असली सवाल यह है कि जब ऐसे बयान दिए जा रहे हैं तो हम निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? जनता सब कुछ देख रही है। जब जनता को लगेगा कि बस हो गया, तो वे पैसे भी लेंगे और थप्पड़ भी मारेंगे। वह दिन दूर नहीं है।” बता दें, नगर पंचायतों के चुनाव 2 दिसंबर को होने हैं।
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