नागरिकता कानून को लेकर गृह मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्टीकरण जारी किया। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू व पांच अन्य समुदायों के शरणार्थियों को स्वत: भारतीय नागरिकता नहीं मिल जाएगी और उन्हें जरूरी मानदंड पूरे करने के बाद ही भारतीय नागरिक बनने का अधिकार होगा। केंद्र सरकार प्रावधानों को अमल में लाने के लिए नियम बनाएगी। इसके साथ ही, गृह मंत्रालय ने राज्यों से हिंसा रोकने, फर्जी खबरों पर लगाम लगाने को कहा।

नागरिकता को लेकर गृह मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन के बीच आया है। गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ‘नए कानून का यह मतलब नहीं है कि सभी शरणार्थियों या अवैध प्रवासियों को स्वत: ही भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। उन्हें नागरिकता के लिए आवेदन करना होगा, जिस पर सक्षम अधिकारी विचार करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘संबंधित आवेदक को जरूरी मानदंडों को पूरा करने के बाद ही भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी।’

अधिकारी के मुताबिक, ‘इन समुदायों का कोई भी शरणार्थी स्वत: ही भारतीय नागरिक नहीं बन जाएगा। उसे ऑनलाइन आवेदन करना होगा और सक्षम अधिकारी देखेंगे कि वह भारतीय नागरिक के तौर पर पंजीकरण की सभी पात्रताएं पूरी करता है या नहीं।’ संशोधित नागरिकता कानून में तीनों पड़ोसी देशों से यहां आए हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी और जैन समुदाय के शरणार्थियों की खातिर भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करने का प्रावधान है, जिन्हें उन देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो।

इसके अलावा गृह मंत्रालय ने सोमवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से हिंसा रोकने तथा जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाने को कहा। मंत्रालय ने एक परामर्श में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों और अफवाहों के खिलाफ भी कार्रवाई को करने को कहा, जिनसे हिंसा भड़क सकती है। मंत्रालय ने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होने की घटनाओं के मद्देनजर राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया गया है।

परामर्श में कहा गया, ‘यह जरूरी है कि हिंसा रोकने, नागरिकों की जान की हिफाजत करने और संपत्तियों को नुकसान होने से रोकने के लिए कदम उठाए जाएं।’