बीबीसी की ओर से भारत सरकार की सलाह की अनदेखी करते हुए दिल्ली के सामूहिक बलात्कार पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘इंडियाज डॉटर’ प्रसारित किए जाने से नाराज सरकार ने संस्था को नोटिस भेजा है। इस फिल्म में सामूहिक बलात्कार के आरोपी मुकेश सिंह के साक्षात्कार को भी दिखाया गया है।
सरकार ने ब्रिटेन के इस प्रमुख मीडिया समूह को कानूनी नोटिस दिया और वीडियो शेयरिंग वेबसाइट यूट्यूब से कहा कि वह इस वृत्तचित्र को हटा दे क्योंकि यह बेहद संवेदनशील है। नोटिस में सरकार ने बीबीसी से कहा कि उसने वृत्तचित्र का वाणिज्यिक मकसद से इस्तेमाल नहीं करने के करार का उल्लंघन किया है। इस कारण इस प्रमुख ब्रिटिश मीडिया समूह पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने गुरुवार को कहा-वृत्तचित्र के वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए बीबीसी ने कोई जरूरी अनुमति नहीं ली। हमने नोटिस दिया है और हम उनके जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आगे की कार्रवाई प्रतीक्षारत है। यह नोटिस बुधवार शाम को बीबीसी के ब्रिटेन में अंतरराष्ट्रीय समयानुसार रात 10 बजे फिल्म प्रसारित करने के पहले ही तामील कर दिया गया था। इसे तिहाड़ जेल के महानिदेशक आलोक कुमार वर्मा ने सरकारी वकील के जरिए तामील करवाया।
इसके साथ ही सरकार ने वीडियो शेयरिंग वेबसाइट यूट्यूब से कहा है कि वह इस वृत्तचित्र को हटा दे क्योंकि यह बेहद संवेदनशील है। इस बीच 16 दिसंबर 2012 के सामूहिक बलात्कार के दोषी मुकेश के इंटरव्यू वाली डाक्यूमेंट्री का प्रसारण किए जाने पर राजनीतिक दलों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं।
इस कार्यक्रम को बुधवार रात में प्रसारित करने के बारे में पूछने पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पत्रकारों से कहा- हां, हमने सभी चैनलों को सूचित किया है कि वृत्तचित्र को जारी नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन बीबीसी ने इसे लंदन में प्रसारित कर दिया। (अब) जो भी कदम हमें उठाना होगा तो गृह मंत्रालय उसे उठाएगा। उन्होंने कहा कि हमने बीबीसी से कहा था कि वह वृत्तचित्र प्रसारित नहीं करे लेकिन बीबीसी ने कहा कि वह एक स्वतंत्र संगठन है और वह प्रसारण करेगा।
यह पूछे जाने पर कि सरकार क्या कर सकती है, सिंह ने कहा कि इस समय कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं यही कह सकता हूं जो भी आवश्यक होगा, किया जाएगा। अगर शर्तों का उल्लंघन किया गया है तो उपयुक्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा-आप देखते रहिए। मैंने सूचना और प्रसारण मंत्री से बात की है और विदेश मंत्रालय को लिखा है। कार्रवाई चल रही है।
इस बीच, संचार व आइटी मंत्रालय ने यूट्यूब से कहा कि यह मुद्दा बेहद संवेदनशील है और इस मामले में उसे अपनी स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए और वेबसाइट से इसे हटा देना चाहिए। संपर्क करने पर यूट्यूब प्रवक्ता ने कहा कि भले ही हमारा मानना है कि सूचना तक पहुंच मुक्त समाज का आधार होती है और यूट्यूब जैसी सेवाओं के माध्यम से लोगों को अपने को अभिव्यक्त करने में मदद मिलती है और वे विभिन्न दृष्टिकोण साझा करते हैं लेकिन हम अधिसूचित किए जाने के बाद ऐसी सामग्री को हटाते रहते हैं जो गैरकानूनी हो या हमारे सामुदायिक दिशानिर्देश का उल्लंघन करती हो।
बहरहाल उसने इस बात की पुष्टि नहीं की कि क्या उसे सरकार से अधिसूचना प्राप्त हुई है, जो उसकी साइट से सामग्री हटाने के लिए जरूरी है। यह समाचार लिखे जाने के समय तक वृत्तचित्र यूट्यूब पर उपलब्ध था और उसे लोग एक-दूसरे को शेयर कर रहे थे।
यह पूछे जाने पर कि वृत्तचित्र के फिल्मांकन की अनुमति देने के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार की तरफ से कोई विफलता नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यह अनुमति उनके कार्यकाल में नहीं दी गई। इस मुद्दे पर बुधवार को विस्तृत बयान दे चुके सिंह ने कहा कि मैंने बुधवार को संसद में भी यह कहा था कि हम उन सभी प्रावधानों को हटा रहे हैं जिनके तहत यह अनुमति दी गई, ताकि भविष्य में ऐसी गलती न हो सके।
उन्होंने कहा कि अगर उल्लंघन किया गया है तो निश्चित तौर पर किसी की जिम्मेदारी तय की जा सकती है और अगर जिम्मेदारी तय हो गई तो कार्रवाई भी होगी। गृह मंत्री का यह बयान तब आया जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार प्रतिबंध का उल्लंघन करने के लिए ब्रिटेन के इस प्रमुख मीडिया समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय अनुमति की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण ब्रिटिश फिल्मकार लेस्ले उडविन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बारे में योजना बना रही है। वृत्तचित्र में उडविन और बीबीसी ने बस चालक मुकेश सिंह का साक्षात्कार किया है। मुकेश ने इसमें महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं।
बीबीसी ने इस वृत्तचित्र का प्रसारण कर दिया है। हालांकि दिल्ली की एक अदालत ने उस पर इसके लिए रोक लगाई थी। बीबीसी ने गुरुवार को सरकार को अवगत कराया कि उसके निर्देशों का पालन करते हुए इस फिल्म को भारत में प्रसारित करने की उसकी कोई योजना नहीं है।
डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण किए जाने को लेकर राजनीतिक दलों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। भाजपा के प्रवक्ता जीवीएल नरसिंह राव ने कहा- मैं समझता हूं कि फिल्म को समय से पहले प्रसारित करने का फैसला करके बीबीसी देश में अपनी नैतिकता और विश्वसनीयता खो चुका है। सरकार पहले ही निर्णय कर चुकी है कि वह उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जिन्होंने नियमों और मानदंडों का उल्लंघन किया।
उन्होंने कहा कि उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार इस बारे में आवश्यक कदम उठाएगी कि यह डाक्यूमेंट्री आगे प्रसारित नहीं हो। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि बीबीसी ने इसका प्रसारण करके देश की छवि को खराब करने का प्रयास किया है। दूसरी ओर कांग्रेस नेता प्रिया दत्त ने हालांकि मुकेश के इंटरव्यू वाली डाक्यूमेंट्री के प्रसारण का समर्थन करते हुए कहा कि यह बलात्कारियों की मानसिकता का पर्दाफाश करती है, न कि उसका बचाव करती है। उन्होंने कहा- मैं डाक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय से स्तब्ध हूं। हर रोज बलात्कार हो रहे हैं और इसका पर्दाफाश हुआ है।
डॉक्यूमेंट्री बलात्कार का बचाव नहीं करती, वास्तविकता में इसने बलात्कारी की मानसिकता को दर्शाया है। दत्त ने कहा- बलात्कारियों को मंच नहीं दिया गया है। मैं (निर्भया के) माता-पिता को लेकर दुखी हूं कि उन्हें एक बार फिर इस तरह की तकलीफ से गुजरना पड़ रहा है। न्याय में देरी, न्याय से इनकार है। इस कहानी को बताए जाने की जरूरत है।
जद (एकी) नेता अली अनवर ने बलात्कार के दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाने की मांग करते हुए कहा कि सवाल यह है कि सरकार उसे (मुकेश) फांसी के फंदे पर क्यों नहीं लटका रही है। कई लोगों को बारी के बिना पहले दंड दिया गया है। मैंने राजनाथ सिंह से पूछा कि इस मामले के दोषियों को फांसी देने में देर क्यों की गई, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। मुकेश के इंटरव्यू वाली बीबीसी की इस डाक्यूमेंट्री के प्रसारण को लेकर सोशल मीडिया में आनलाइन बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने डाक्यूमेंट्री के प्रसारण का समर्थन किया है। इनमें अभिनेता रणवीर शौरी ने प्रसारण पर प्रतिबंध हटाने की मांग की है। लेखक चेतन भगत ने भी डाक्यूमेंट्री का समर्थन करते हुए सभी से इस इंटरव्यू को देखने को कहा।
‘शुतुरमुर्ग जैसी मानसिकता’ पर सवाल:
बॉलीवुड से जुड़ी और अन्य हस्तियों ने वृत्तचित्र के प्रसारण पर रोक लगाने के सरकार के फैसले की आलोचना की और इसे शुतुरमुर्ग मानसिकता वाला कदम बताया। अनुराग बसु ने ट्वीट किया कि प्रतिबंध लगाने की यह शुतुरमुर्ग मानसिकता अपना सिर रेत में छिपाने की तरह है ताकि कोई मुझे देख नहीं पाए। फिल्मकार अभिषेक कपूर ने कहा कि फिल्म प्रत्येक भारतीय की आंतों पर एक मुक्का है। यह आरोपियों का बचाव करने वाले वकील और हर उस व्यक्ति के चहेरे पर थूकने के समान है जो इस पर रोक लगाना चाहते हैं।
निर्देशक पुनीत मल्होत्रा ने ट्वीट किया कि मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि सरकार ने एक वृत्तचित्र को प्रतिबंधित करने के लिए फौरन कदम कैसे उठा लिया लेकिन ऐसे बलात्कारियों को तीन वर्ष तक जीवित रहने दिया। उन्हें फौरन मार दिया जाना चाहिए। अभिनेता सिद्धार्थ ने कहा कि अमेरिकी सेना में बलात्कारी पर फिल्म सही। कैथोलिक चर्च में बलात्कार के बारे में दिखाना सही। भारत में बलात्कार के बारे में फिल्म प्रतिबंध। इंडियाज डाटर डार्क एजेस। लेखक चेतन भगत ने सभी से इस इंटरव्यू को देखने को कहा। वहीं बोल्डमांक नाम से एक अन्य ने ट्वीट किया कि बलात्कारी का इंटरव्यू करने से कहीं अधिक घिनौना यह है उस इंटरव्यू का व्यापार करना।
भारत में नहीं होगा प्रसारण:
गृह मंत्रालय को भेजे एक संदेश में बीबीसी ने कहा है कि भारत सरकार के निर्देश का अनुपालन करते हुए वह डाक्यूमेंट्री का प्रसारण भारत में नहीं करेगा। हालांकि इसी संदेश में ब्रिटिश मीडिया कंपनी ने कहा है कि उसने बुधवार रात दस बजे ब्रिटेन में इसका प्रसारण किया है।
बीबीसी पर कार्रवाई के विकल्पों पर विचार:
सरकार ने गुरुवार को कहा कि वह बीबीसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के विकल्पों पर विचार कर रही है। गृह मंत्री ने पत्रकारों से कहा- सभी विकल्प खुले हैं। हम सभी तथ्यों को देख रहे हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ब्रिटिश फिल्म निर्माता लेसली उडविन के खिलाफ भी जेल अधिकारियों की अनुमति की शर्तों के कथित उल्लंघन के लिए कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। इस बीच दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि तिहाड़ जेल में बलात्कार के दोषी मुकेश से किए गए इंटरव्यू के प्रसारण पर रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी।
पीड़िता के परिजनों ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी:
पीड़िता के पिता ने कहा कि उनसे साफ तौर पर कहा गया था कि वे हमारी बेटी का नाम और फोटो जाहिर नहीं करें। उन्होंने ऐसा किया और यह सही नहीं है। हम इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि बीबीसी ने भारत सरकार को चुनौती दी है। भारत सरकार बीबीसी को माकूल जवाब देगी इसका उन्हें भरोसा है।
