दिल्ली हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर के लिए भेजे गए पांच नामों को लेकर सरकार परेशानी में पड़ती नजर आ रही है। दरअसल तीन महीने पहले कोलेजियम की ओर से की गई चार जजों की नियुक्ति की सिफारिश के बाद सरकार ने बैकग्राउंड जांच के लिए उनमें से तीन लोगों के नाम इंटेलिजेंस ब्यूरो को भेजे हैं। बता दें कि मेमेरोडेंम ऑफ प्रोसिजर के मुताबिक  बैकग्राउंड और उनकी साख की जांच के लिए प्रतिभागियों के नाम आईबी को भेजे जाते हैं। लेकिन सरकार ने आईबी की चौंकाने वाली रिपोर्ट के बाद फिर से तीन वकीलों के नाम जांच के लिए भेजे हैं।

गौरतलब है कि पहली रिपोर्ट में आईबी ने एक महिला वकील की जांच में ईमानदारी वाले कॉलम को खाली छोड़ दिया था, जबकि दूसरे वकील को लेकर कहा था कि वकील ने अभी तक किसी भी अहम केस में बहस नहीं की है और वकील का कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है। वहीं तीसरे वकील के लिए आईबी ने कहा था कि वह अपने भाई के साथ रहता है, जिसका नाम कथित तौर पर एस्सार टेप में सामने आया था। बता दें कि जुलाई के आखिरी सप्ताह में मंत्रालय ने स्पष्टीकरण के लिए एक बार फिर इन नामों को आईबीए के पास भेजा था। इस बार आईबी ने कहा कि लोगों का मानना है कि तीन में से दो वकील ईमानदार नहीं है, लेकिन इस राय का कुछ नहीं किया जा सकता। लेकिन तीसरे वकील के बारे में आईबी का ये ही मानना था कि वकील ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में से किसी भी कोर्ट में अकेले किसी अहम केस में बहस नहीं की है। वहीं कानून मंत्रालय आईबी की दूसरी रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद नये एमओपी को अंतिम रुप देने के लिए विचार कर रहा है।